Aug ०९, २०२० १९:४७ Asia/Kolkata
  • ईरान में यूं मनाया जाएगा मुहर्रम, ईरानी सरकार ने जारी की गाइड लाइन, दूसरे देश भी इसी तरह से मना सकते हैं मुहर्रम

ईरान में कोरोना निरोधक समिति ने मुहर्रम में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लिए शोक सभाओं के आयोजन की गाइड लाइन जारी कर दी है।

     समिति की ओर से जारी बयान में कहा है कि ईरानियों के निकट मुहर्रम के विशेष स्थान की वजह से समिति ने ज़िम्मेदार विभागों के साथ सलाह व मशविरा करके, इस वर्ष मुहर्रम मनाने के लिए कुछ नियम बनाए हैं

     बयान में बताया गया है कि जिन संगठनों को शोक सभाओं के आयोजन की सरकारी अनुमति मिली है उनके लिए खुली जगह में और भाग लेने वालों में कम से कम दो मीटर की दूरी के साथ कार्यक्रम का आयोजन ज़रूरी है। इसी तरह कोई भी कार्यक्रम दो घंटे से अधिक समय तक नहीं हो सकता, जुलूस और रैली का आयोजन नहीं होगा, शोक सभाओं में ढोल, ताशे और झांझर आदि का प्रयोग नहीं किया जा सकता, सामाजिक दूरी ज़रूरी होगी, पूरी समय हर व्यक्ति को मास्क लगाए रखना होगा।

     बयान में कहा गया है कि देश भर के कुछ मशहूर इमामबाड़ों की मशहूर शोक सभाओं पर, बहुत अधिक भीड़ होने की वजह से प्रतिबंध लगाया जाता है और इस साल मुहर्रम में पूरे ईरान में मशहूर कार्यक्रम नहीं होंगे।

     बयान के अनुसार, इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम और हज़रत मासूमा अलैहास्सलाम के रौज़ों और इस तरह के अन्य पवित्र स्थलों में मातमी जुलूस नहीं जा सकता और इन स्थलों में खुली जगह में शोक सभाओं का आयोजन किया जाएगा।

ईरान के ज़न्जान प्रातं में शोक सभा 

 

     नियम के अनुसार मस्जिदों में नमाज़ के लिए एक घंटे तक लोग जा सकते हैं लेकिन इसके लिए कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए समिति के सभी निर्देशों का पालन आवश्यक होगा।

     बयान में कहा गया है कि कोरोना के फैलाव के डर की वजह से मुहर्रम के दौरान, नज़्र के तौर पर किसी भी प्रकार की खाने पीने की चीज़ें बांटने पर प्रतिबंध है और किसी भी तरह से लोगों को खाना पीना नहीं बांटा जा सकता। इस लिए अगर शोक सभा में कुछ बांटना होगा तो वह चीज़ या तो सूखी हो या फिर कच्ची हो।  इस लिए किसी भी तरह की सबील लगाने पर प्रतिबंध होगा और संबंधित विभग की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की शोक सभा का आयोजन नहीं किया जा सकता।

     याद रहे पूरी दुनिया के शिया मुसलमान, पहली मुहर्रम से दस मुहर्रम तक पैगम्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम हुसैन का शोक मनाते हैं जिन्हें 1400 साल पहले मुहर्रम में ही बड़ी बेदर्दी के साथ शहीद कर दिया गया था।

     इमाम हुसैन और उनके साथ शहीद होने वाले उनके साथियों का मज़ार, इराक़ के कर्बला नगर में है जहां हर साल मुहर्रम के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है मगर इस साल कर्बला में भी मुहर्रम के अवसर पर प्रवेश पर प्रतिबंध है। Q.A.

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