Aug १४, २०२० १३:१२ Asia/Kolkata
  • अरब जगत के माथे से कलंक का यह टीका कौन मिटा पाएगा?

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई ने 4 जून 1990 को इमाम ख़ुमैनी की बर्सी के कार्यक्रम में अपने भाषण में कुछ बातें कही थीं जो इस समय बड़ी शिद्दत से याद आ रही हैं।

उन्होंने कहा था कि कुछ अरब नरेशों और नेताओं ने अपने पालनहार अमरीका को ख़ुश करने के लिए अपने अरबी स्वाभिमान को भी भुला दिया जिसका वह हमेशा दम भरते हैं। अरब जगत के माथे से कलंक का यह टीका कौन मिटा पाएगा? क्या अरब देशों के मुस्लिम युवा इस विश्वासघात को सहन कर पाएंगे?

ग़ैर क़ानूनी शासन इस्राईल के ख़िलाफ़ दिखाया जाने वाला वह जोश कहां चला गया? वह वादे कहां गए जो अरब नेताओं ने इस्राईल के ख़िलाफ़ युद्ध के बारे में अपनी जनता से किए थे? अल्लाह और उसके नेक बंदों की लानत हो उस हाथ पर जिसने इस्राईल के साथ पहले शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और भले बंदो, फ़रिश्तों और ईश्वरीय दूतों की लानत हो उन लोगों पर जो उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से उन लोगों पर जिन्होंने फ़िलिस्तीनी जनता को झूठ उम्मीद दिलाई।

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