Sep १६, २०२० १८:०३ Asia/Kolkata
  • ज़रशूरान गोल्ड कॉम्पलैक्स
    ज़रशूरान गोल्ड कॉम्पलैक्स

तेहरान का कहना है कि ईरान ने अमरीकी प्रतिबंधों को पूरी तरह से प्रभावहीन बनाने के लिए देश में मौजूद सोने की बड़ी संभावनाओं से लाभ उठाने का फ़ैसला लिया है।

ईरान, दुनिया में इस्पात के बड़े निर्यातकों में से एक है, और अमरीकी प्रतिबंधों के बावजूद, दूसरे देशों को इस्पात का निर्यात कर रहा है। योजना के अनुसार, 2025 तक ईरान के इस्ताप का उत्पादन बढ़कर 5 करोड़ 50 लाख टन प्रति वर्ष हो जाएगा, जिसमें से क़रीब 50 प्रतिशत इस्पात  का वह निर्यात कर सकेगा।

देश की तेल उद्योग को प्रतिबंधों में मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है, जिसकी वजह से आय में भारी कटौती हुई है, इस नुक़सान की भरपाई के लिए ईरान ने अन्य स्रोतों और संसाधनों पर ध्यान केन्द्रित किया है, जिसमें से एक खनन है, जिससे होने वाली आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

तेल उद्योग की तुलना में खनन उद्योग को निशाना बनाना आसान नहीं है, इसलिए कि रेडियो एक्टिव जैसे अति संवेदनशील पदार्थों से लेकर चूने जैसे साधारण पदार्थों तक, 120 तत्व शामिल हैं।

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, ईरान के 21 प्रांतों में ऐसे इलाक़ों की पहचान कर ली गई है, जहां बड़ी मात्रा में सोने की खानें मौजूद हैं। एक अनुमान के मुताबिक़, देश की 24 खानों में 340 मैट्रिक टन सोना मौजूद है।

हालांकि आगे चलकर इस आंकड़े में काफ़ी हद तक वृद्धि की संभावना है।

उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय के अधिकारी दारयूश इस्माईली का कहना है कि सोने के क्षेत्र में ईरान के पास हज़ारों संभावनाएं हैं और जल्दी ही देश में इस्पात की तरह सोना भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

उन्होंने कहा कि देश में जल्द ही सोने के उत्पादन की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में क्रांति आ सकती है।

ईरान की सोने की क्षमता 9 मिलियन मैट्रिक टन से ज़्यादा है। तकब में ज़रशूरान गोल्ड कॉम्पलैक्स सबसे महत्वपूर्ण खनिजों में से एक है। अनुमान के मुताबिक़, इसमें 110 टन सोने का भंडार है। msm

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