Sep १८, २०२० २०:२० Asia/Kolkata
  • ईरान के लिए निर्णायक रविवार, पोम्पियो जी! इस बार भी आप कुछ नहीं कर पाएंगे, ट्रेगर दबेगा ही नहीं! ईरानी विदेश मंत्री का खुला चैलेंज ...

अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि अमरीका ने ईरान के खिलाफ स्नैप बैक मेकानिज़्म सक्रिय कर दिया है और रविवार 20 सितंबर से ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएंगे।

दर अस्ल सन 2015 में जब ईरान और विश्व की बड़ी शक्तियों ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किये तो उसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में पूर्ण सहमति से प्रस्ताव 2231 पारित किया गया जिसके अनुसार, ईरान पर एक व्यवस्था के तहत ईरान पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रतिबंध हटाने का प्रावधान रखा गया था। इस लिए प्रस्ताव पारित होने के बाद ईरान पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रतिबंध हट गये लेकिन इसी प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अगर परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला कोई देश, समझौते के वचनों के पालन के बारे में कोई शिकायत करे तो उसकी शिकायत पर संयुक्त आयोग में चर्चा होगी और अगर संयुक्त आयोग में सहमति न बन पाए तो यह मामला सुरक्षा परिषद में उठाया जाएगा जहां सुरक्षा परिषद के पास 30 दिनों का अवसर होगा जिसके दौरान वह यह फैसला करेगी कि ईरान के खिलाफ प्रतिबंध खत्म रहें  या फिर से लागू हो जाएं?

लेकिन अगर 30 दिन की इस मोहलत में सुरक्षा परिषद कोई प्रस्ताव पारित करने में सफल न हो पाए तो ट्रिगर मैकेनिज़्म सक्रिय हो जाएगा और सुरक्षा परिषद के सभी प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएंगे। लेकिन अगर ब्रिटेन, फ्रासं, रूस और चीन जैसे सुरक्षा परिषद के चार सदस्यों की सहमति से परमाणु समझौते के जारी रहने और प्रतिबंधों के निरस्त रहने के लिए कोई प्रस्ताव पारित भी कर दिया तब भी उसके लिए अमरीका की सहमति ज़रूरी है अन्यथा इस दशा में भी ट्रिगर व्यवस्था सक्रिय हो जाएगी और ईरान पर सारे प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएंगे।

विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ

 

अमरीका ने एक पत्र लिख कर सुरक्षा परिषद से मांग थी की कि ईरान ने चूंकि समझौते का उल्लंघन किया है इस लिए उसके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रतिबंध ट्रेगर मैकेनिज़्म के तहत वापस लाए जाने चाहिए और रविवार 20 सितंबर को 30 दिन की मोहलत पूरी हो रही है और सुरक्षा परिषद ने कोई प्रस्ताव भी पारित नहीं किया है।

लेकिन अस्ल बात तो यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सन 2018 में ही ईरान के साथ हुए समझौते को अमरीका के इतिहास का सब से बुरा समझौता बता कर उससे अमरीका के निकलने का औपचारिक एलान कर चुके हैं और अमरीका ने इस समझौते से निकलने के बाद ईरान पर अमरीका के प्रतिबंध भी लागू कर दिये हैं इस लिए अब, सुरक्षा परिषद के चार सदस्यों, यानि रूस, चीन, ब्रिटेन, और फ्रांस का कहना है कि अमरीका जब इस समझौते का सदस्य ही नहीं रहा तो उसे इस समझौते के किसी अनुच्छेद के अंतर्गत मांग करने का कानूनी अधिकार नहीं है और जब  उसे अधिकार ही हासिल नहीं है तो उसकी मांग के आधार पर ट्रेगर मैकेनिज़्म कैसे सक्रिय हो सकता है?

तो सवाल यह है कि 20 सितंबर रविवार को क्या होगा?

ईरान के विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ ने अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो  को संबोधित करते हुए कहा है कि पोम्पियो अपनी गलत फहमी दूर करें, 20 सितंबर को कुछ नहीं होने वाला, अगर शक है तो प्रस्ताव क्रमांक 2231 फिर से पढ़ लें।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा है कि ट्रेगर मैकेनिज़्म सक्रिय नहीं होगा लेकिन क्या सच में ऐसा है और क्या हो सकता है?

 ईरानी विदेशमंत्रालय में मध्य पूर्व के पूर्व महानिदेशक क़ासिम मुहिबअली का कहना है कि हमें इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि सुरक्षा परिषद के 13 सदस्य, सयुंक्त राष्ट्र संघ के सचिवालय, परमाणु समझौते के सदस्यों और सुरक्षा परिषद के वर्तमान प्रमुख ने अमरीका की मांग को स्वीकार नहीं किया है इस लिए कानूनी और तार्किक दृष्टि से तो यह बात पूरे विश्वास के साथ कही जा सकती है कि अमरीका की मांग व्यवहारिक नहीं है और इस मांग  के आधार पर सयुंक्त राष्ट्र संघ के प्रतिबंध ईरान पर फिर से लागू होने वाले नहीं हैं लेकिन सच्चाई इससे आगे भी है। यह भी हो सकता है कि 20 सितंबर को नाकामी के बाद अमरीका यह  एलान कर दे कि उसकी नज़र में ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ के सारे प्रतिबंध फिर से लागू हो चुके हैं इस लिए अब जो देश भी ईरान के साथ व्यापार करेगा उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इस तरह से अमरीका अन्य देशों को डरा पर एक तरह से ईरान पर प्रतिबंध लगा सकता है।

     वे कहते हैं कि अब अगर किसी भी वजह से ईरान भी समझौते से बाहर निकल जाता है तो फिर अन्य देश भी अमरीका का साथ देंगे और इस तरह से बड़ी सरलता से सुरक्षा परिषद के सभी प्रतिबंध, ईरान पर फिर से लागू हो जाएंगे। अस्ल मामला यह है कि जब तक ईरान समझौते में रहेगा और उसका पालन करता रहेगा, कानूनी तौर पर अमरीका के साथ समझौते का सदस्य कोई देश नहीं जा सकता। इस लिए हमारी नज़र में ईरान के लिए बेहतर यह है कि वह हर हाल में समझौते में बाकी रहे, कम से कम अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम आने तक। इन हालात में अब देखना यह है कि रविवार को क्या होता है और उसके बाद ईरान क्या फैसला करता है? Q.A.

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