Sep १९, २०२० १०:१५ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? जहां पर लड़के और लड़कियां एक साथ रहने पर विवश हों वहां विवाह को रोज़गार पर प्राथमिकता प्राप्त है।

अगर कोई अच्छा, सद्कर्मी और अमानतदार युवा मिले तो लड़की के पिता या अन्य परिजनों की ओर से उसे विवाह का प्रस्ताव देने में कोई बुराई नहीं है।

सूरए क़सस की आयत क्रमांक 27 और 28 का अनुवाद:

शुऐब ने (मूसा से) कहा, "मैं चाहता हूँ कि अपनी इन दोनों बेटियों में से एक का विवाह तुम्हारे साथ इस शर्त पर कर दूँ कि तुम आठ वर्ष तक मेरे यहाँ नौकरी करो। और यदि तुम दस वर्ष पूरे कर दो तो यह तुम्हारी ओर से होगा और मैं तुम्हें कठिनाई में डालना नहीं चाहता। यदि ईश्वर ने चाहा तो तुम मुझे भले लोगों में से पाओगे। मूसा ने कहा, यह मेरे और आपके बीच तै हो गया। इन दोनों अवधियों में से जो भी मैं पूरी कर दूँ तो मुझ पर कोई अत्याचार नहीं होगा। और जो कुछ हम कह रहे है, उस पर ईश्वर (गवाह और) रक्षक है।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

लड़की के विवाह के समय मेहर के निर्धारण में लड़के की आर्थिक क्षमता को भी दृष्टिगत रखना चाहिए और उसे कठिनाई में नहीं डालना चाहिए।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. अगर कोई अच्छा, सद्कर्मी और अमानतदार युवा मिले तो लड़की के पिता या अन्य परिजनों की ओर से उसे विवाह का प्रस्ताव देने में कोई बुराई नहीं है।

  2. जहां पर लड़के और लड़कियां एक साथ रहने पर विवश हों वहां विवाह को रोज़गार पर प्राथमिकता प्राप्त है।

  3. लड़की के विवाह के समय मेहर के निर्धारण में लड़के की आर्थिक क्षमता को भी दृष्टिगत रखना चाहिए और उसे कठिनाई में नहीं डालना चाहिए।​​​​​​​

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