Sep २०, २०२० १०:४६ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? पत्नी और बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति की ज़िम्मेदारी पुरुष की है और परिवार को भी चाहिए कि जीवन की समस्याओं के समाधान में उसका साथ दे।

देश प्रेम एक स्वाभाविक बात है और हर किसी को यह अधिकार है कि वह अपनी मातृभूमि की ओर वापस लौटे चाहे वह वर्षों तक उससे दूर रहा हो।

सूरए क़सस की आयत क्रमांक 29 का अनुवाद:

फिर जब मूसा ने (शुऐब के साथ अपने समझौते की) अवधि पूरी कर दी और अपने परिजनों को लेकर (मिस्र की ओर) चले तो (उन्होंने) तूर पर्वत की ओर एक आग देखी। उन्होंने अपने परिजनों से कहा, यहीं रुक जाओ कि मैंने एक आग देखी है। शायद मैं वहाँ से तुम्हारे लिए कोई ख़बर ले आऊँ या उस आग से कोई अंगारा (ले आऊं) ताकि तुम (उससे आग) ताप सको।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को, जिन्होंने बरसों तक महल में ज़िंदगी गुज़ारी थी, दस साल तक भेड़ें चराना और मरुस्थल में रहना चाहिए ताकि उन्हें महल में रहने की आदत न पड़े और साथ ही वे जीवन में आगे आने वाले बड़ी समस्याओं के लिए तैयार हो सकें।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. पत्नी और बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति की ज़िम्मेदारी पुरुष की है और परिवार को भी चाहिए कि जीवन की समस्याओं के समाधान में उसका साथ दे।

  2. देश प्रेम एक स्वाभाविक बात है और हर किसी को यह अधिकार है कि वह अपनी मातृभूमि की ओर वापस लौटे चाहे वह वर्षों तक उससे दूर रहा हो।

  3. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को, जिन्होंने बरसों तक महल में ज़िंदगी गुज़ारी थी, दस साल तक भेड़ें चराना और मरुस्थल में रहना चाहिए ताकि उन्हें महल में रहने की आदत न पड़े और साथ ही वे जीवन में आगे आने वाले बड़ी समस्याओं के लिए तैयार हो सकें।

 

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