Sep २०, २०२० १५:५७ Asia/Kolkata
  • परशियन गल्फ में ईरान व अमरीका में हो सकती है भिड़ंत... ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान से टकराव हो... ब्रिटिश समाचार पत्र ने बतायी वजह...

हालिया दिनों में अमरीका और ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है और कई राजनयिक मोर्चों पर अमरीका की हार के बाद यह आशंका बढ़ गयी है कि अमरीका तनाव बढ़ा सकता है। ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र इंडिपेंडेन्ट  ने अपने एक लेख में हालात का जायज़ा लिया है।

ब्रिटिश समाचारपत्र, इंडिपेंडेन्ट ने अपने एक लेख में कहा है कि निकट भविष्य में अमरीका ईरान पर दबाव बहुत अधिक बढ़ा देगा जिसके तहत यह भी हो सकता है कि अमरीकी युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय समुद्र में ईरानी जहाज़ों को रोक कर उनकी तलाशी लेने की कोशिश करें जिसके बाद निश्चित रूप से दोनों देशों के बीच तनाव सीमा से अधिक बढ़ जाएगा।

     समाचार पत्र ने लिया है कि ईरान पर अधिक प्रतिबंध लगाने और दबाव बढ़ाने की अमरीकी कोशिशों का सुरक्षा परिषद में विरोध हुआ लेकिन अमरीका दबाव की नीति जारी रखने पर आग्रह कर रहा है और ईरान और वेनेज़ोएला के लिए अमरीका के विशेष दूत एलियट अबराम्ज़ ने कहा है कि अमरीका आगे जो भी क़दम उठाएगा वह ईरान के अलावा वेनेज़ोएला के लिए भी होगा।

 

     याद रहे ईरान और वेनेज़ोएला के मामले में अमरीका के विशेष दूत एलियट अबराम्ज़ ने ब्रायन हूक के त्यागपत्र के बाद यह पद संभाला है और वह अमरीका की विदेश नीतियां बनाने में प्रसिद्ध रहे हैं  जबकि अतीत में उन पर यह भी आरोप लग चुका है कि उन्होंने ईरान को अवैध हथियारों की बिक्री से मिलने वाली रक़म को सेंट्रल अमरीका के छापामार गुटों की मदद के लिए प्रयोग किया जिन पर युद्ध अपराध का आरोप लगा था लेकिन बाद में उन्हें क्षमा मिल गयी थी।

     इंडिपेंडेन्ट से  वार्ता में एक वरिष्ठ कूटनयिक ने कहा है कि अगर अमरीका ने किसी भी ईरानी जहाज़ को रोकने की कोशिश की तो फिर उसके बाद जो हो सकता है उसका अनुमान भी किसी को नहीं है लेकिन यह तो निश्चित है कि हालात और खराब होंगे क्योंकि इस समय भी दोनों पक्षों में विश्वास नहीं है।

 

     कुछ दिनों पहले ईरान के जवान समाचार पत्र ने चेतावनी दी थी कि अगर युरोप ने स्नैप बैक में ईरान का साथ नहीं दिया तो  ईरान परमाणु समझौते से निकल सकता है जिसके बाद वह कैमरे बंद कर देगा और यूरेनियम का 90 प्रतिशत संवर्धन आरंभ कर देगा।

     इस समय ट्रम्प सरकार के सामने अपनी बची हुए कुछ महीनों की सत्ता और शायद अंतिम अवसर में एक ही रास्ता है कि वह अपने पुराने दुश्मन ईरान के खिलाफ कुछ एसा करें जिससे उनके कुछ वोटर फिर से उनका समर्थन करने लगें। Q.A. साभार, इंडिपेंडेन्ट

 

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