Sep २१, २०२० १०:०३ Asia/Kolkata
  • पोम्पेयो ने ईरान पर लगाए प्रतिबंध और जवाबी कार्यवाही का कर रहे हैं इंतेज़ार...क्या अमरीका अब ईरान की नौकाएं और जहाज़ पकड़ेगा? ईरान का जवाब क्या होगा?

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने रविवार को एलान किया कि उनकी सरकार ने ईरान पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगाए गए सारे प्रतिबंधों को जो स्थगित किए जा चुके हैं फिर से बहाल कर दिया है और जो भी देश इन प्रतिबंधों पर अमल नहीं करेगा उसे ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

यह जंग का एलान है जो अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव से छह हफ़्ते पहले किया जा रहा है। पर्यवेक्षक मानते हैं कि अमरीका ने कोई योजना बनाई है जिसे लागू करने की क़वायद शुरू हुई है, हो सकता है कि अमरीका फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में या ओमान सागर में ईरान की कोई नौका या जहाज़ पकड़े जिस पर ईरान कोई जवाबी कार्यवाही करे तो अमरीका को बड़े पैमाने पर हमले का बहाना मिल जाए इसके अलावा अमरीका को ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगवाने का मौक़ा भी हाथ आ जाएगा।

ट्रम्प प्रशासन की यह सोच है कि अगर किसी तरह ईरान अमरीका के हितों पर हमला कर देता है तो देश की जनता समर्थन में खड़ी हो जाएगी। पोम्पेयो इस सोच के कट्टर समर्थकों में गिने जाते हैं और ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध की योजना को मेहनत से आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल हैं। यह शायद आगामी चुनाव में ट्रम्प को हार से बचाने की आख़िरी कोशिश है। आने वाले हफ़्तों में ईरान के ख़िलाफ़ अपनी इस योजना पर अमल करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने तैयारी के रूप में कई क़दम उठाए हैं।

एक तो यह कि अमरीका ने ईरान से पेट्रोकेमिकल पदार्थ लेकर वेनेज़ोएला जाने वाले जहाज़ों को पकड़ा जिसे ब्लूमबर्ग ने समुद्री डकैती का नाम दिया। यह जहाज़ ईरानी नहीं थे और ईरान ने इस पर कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दिखाई।

दूसरे यह कि गत मंगलवार को अमरीका की निगरानी में वाइट हाउस में इमारात और बहरैन ने इस्राईल के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसकी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि दोनों अरब देश अपनी वायु सीमाएं इस्राईली यात्री और सैन्य विमानों के लिए खोल देंगे जिसका मतलब यह है कि ईरान से किसी भी टकराव की स्थिति में अमरीका और इस्राईल इन दोनों अरब देशों के वायु क्षेत्रों का प्रयोग करेंगे।

तीसरे यह कि अमरीका की पोलिटिको मैगज़ीन ने एक इंटैलीजेन्स रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें दावा किया गया है कि ईरान ने क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की शहादत का बदला लेने के लिए दक्षिणी अफ़्रीक़ा में अमरीका की राजदूत के क़त्ल की योजना बनाई थी। दक्षिणी अफ़्रीक़ा ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है मगर मीडिया ने इसे बड़े पैमाने पर कवरेज दी।

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री जोज़ेफ़ बोरेल ने कहा है कि अमरीका के अधिकार क्षेत्र में यह नहीं है कि ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए क्योंकि वह परमाणु समझौते से निकल चुका है। क्रेमलिन हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि अमरीका ने सुरक्षा परिषद की उपेक्षा की है और ख़ुद सुरक्षा परिषद बन बैठा है।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर अमरीका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए तो ईरान जवाब देगा और अमरीकी मांगों के सामने कभी नहीं झुकेगा।

एसे इशारे मिल रहे हैं कि इलाक़े में अमरीका ख़तरनाक साज़िश पर काम कर रहा है अमरीकी विमानवाहक पोत फ़ार्स खाड़ी में पहुंच चुका है और इस इलाक़े में सैकड़ों अमरीकी युद्धक नौकाओं और जहाज़ों को हाई एलर्ट कर दिया गया है।

ट्रम्प हर हाल में चुनाव जीतना चाहते हैं और इसके लिए वह कुछ भी करने पर तैयार हैं चाहे उन्हें पूरे इलाक़े को भस्म कर देने वाला युद्ध ही क्यों न छेड़ना पड़े या अमरीका में नस्लवाद का तूफ़ान खड़ा करना पड़ जाए जो अमरीका को कई टुकड़ों में बांट दे। पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ईरान में क़ैद किए गए अपने जासूस कूटनयिकों को रिहा कराने के लिए ईरान पर हमले की योजना बनाई थी और इस योजना की नाकामी जिमी कार्टर का राजनैतिक कैरियर ले डूबी थी उसी तरह हो सकता है कि ट्रम्प को भी भारी शिकस्त का सामना करना पड़े साथ ही इस्राईल को भी अपने इतिहास की सबसे बड़ी पराजय का मुंह देखना पड़ेगा क्योंकि वह युद्ध में शामिल ज़रूर होगा।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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