Sep २१, २०२० १०:०२ Asia/Kolkata
  • पवित्र रक्षा के दौरान हमारा मुक़ाबला सद्दाम और बास पार्टी से नहीं था बल्कि अमेरिका और साम्राज्यवादी शक्तियों से थाः सर्वोच्च नेता

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई विडियो लिंक के ज़रिए पवित्र प्रतिरक्षा सप्ताह के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि, पवित्र रक्षा के दौरान हमारा मुख्य मुक़ाबला सद्दाम और बास पार्टी से नहीं था बल्कि हमारे मुक़ाबले में साम्राज्वादी ताक़तें विशेषकर अमेरिका था, क्योंकि उन्हें इस्लामी क्रांति से सबसे गंभीर धच्का लगा था।

इस्लामी गणतंत्र ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेन्सिंग के ज़रिए पवित्र रक्षा सप्ताह की 40वीं वर्षगांठ के समारोह का उद्घाटन करने के बाद सैन्य कमांडरों, अधिकारियों और पवित्र युद्ध के दौरान घायल होने वाले योद्धाओं को संबोधित करते हुए कहा कि, ईरान पर थोपे गए आठ वर्षीय युद्ध का उद्देश्य इस्लामी क्रांति को ख़त्म करना था। साम्राज्यवादी शक्तियों ने अपने लक्ष्यों और अपनी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए सद्दाम का इस्तेमाल किया। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि, बाद में मिलने वाले दस्तावेज़ों से यह बात सिद्ध होती है कि युद्ध से पहले सद्दाम ने अमेरिकियों के साथ सांठगांठ की थी। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान संयुक्त अरब इमारात की बंदरगाह पर मालवाहक जहाज़ पहुंचते थे और वहां हथियारों को उतारा जाता था, जिसके बाद उन्हें सद्दाम के हवाले कर दिया जाता था।

इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने यह भी कहा कि पवित्र रक्षा हमारी राष्ट्रीय पहचान और ईरानी राष्ट्र के सबसे तर्कसंगत कार्यों में से एक था। उन्होंने कहा कि योद्धाओं का सम्मान करना राष्ट्रीय कर्तव्य है। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि आज हम जिन युद्धाओं को सम्मान दे रहे हैं वे वह लोग हैं जिन्होंने अपनी जान को निछावर कर दिया, पारिवारिक जीवन के सुख-दुख, मां-बाप और बहुत सारी चीज़ों का बलिदान दिया। वे वह लोग कि जो कुछ भी उनके पास था सब कुछ क़र्बान कर दिया। उन्होंने दुश्मनों को पहचान लिया था इसीलिए देश और इस्लामा की रक्षा की अपनी जान की बाज़ी लगा दी।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना था कि सफलतापूर्वक रक्षा, ईरानी राष्ट्र की पहचान का एक भाग है।

उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र ने पवित्र रक्षा के दौरान, पूर्वी और पश्चिमी शक्तियों का डटकर मुक़ाबला किया और सफलता हासिल की।

आयतुल्लाह ख़ामेनई का कहना था कि सद्दाम, बड़ी शक्तियों और विशेषकर अमरीका की कठपुतली था, इस्लामी क्रांति से अमरीका, नाटो और यूरोपीय देशों को नुक़सान पहुंचा था, इसलिए उन्होंने ईरान पर हमले के लिए सद्दाम को शह दी थी, ताकि इस्लामी क्रांति को उखाड़ फेंकें।

उन्होंने उल्लेख किया कि युद्ध का उद्देश्य, इस्लामी व्यवस्था का पतन करना और ईरान पर एक बार फिर वर्चस्व जमाना था, लेकिन वे ईरान की एक बालिश्त ज़मीन पर भी क़ब्ज़ा नहीं कर सके और इस्लामी क्रांति व ईरानी राष्ट्र को एक क़दम भी पीछे नहीं धकेल सके।

वरिष्ठ नेता का कहना था कि पवित्र रक्षा की एक मानवीय पूंजी, शहीद जनरल सुलेमानी थे, जिन्होंने क्षेत्र में और कूटनीति में आश्चर्यचकित क़दम उठाए, जिनके कारनामों से अभी ईरानी राष्ट्र पूरी तरह से अवगत नहीं है।

अरबईन की ज़ियारत के बारे में उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र, इमाम हुसैन से बहुत प्रेम करती है, लेकिन अरबईन मिलियन मार्च को कोरोना पर क़ाबू पाने के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की सिफ़ारिश पर रद्द किया गया है, इसलिए सभी को इसका पालन करना चाहिए।  

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