Sep २४, २०२० २०:०४ Asia/Kolkata
  • अमरीकी मैगज़ीन नेशनल इंट्रेस्टः बाइडन को ईरान से परमाणु समझौते का मौक़ा गवांना नहीं चाहिए वरना रूहानी नहीं उस नेता से बात करनी होगी जो अमरीका के बारे में कठोर नीति का पक्षधर होगा!

अमरीकी मैगज़ीन नेशनल इंट्रेस्ट ने रियान कोस्टीलो का लेख प्रकाशित किया है जिसमें लेखक का कहना है कि अगर जो बाइडन चुनाव जीतते हैं तो उन्हें ईरान से किया गया परमाणु समझौता बहाल करना चाहिए और ईरान से वार्ता का सिलसिला फिर से आगे बढ़ाना चाहिए।

कुछ टीकाकार यह कहते है कि अमरीका को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए बल्कि कुछ महीने या कुछ साल इंतेज़ार करना चाहिए ताकि ईरान मजबूर होकर अमरीका की शर्तों पर वार्ता के लिए तैयार हो जाए उस समय दोनों देशों के बीच लंबित बहुत से मुद्दों पर समझौते का रास्ता खुल सकता है। मगर लेखक का कहना है कि बाइडन को समय गवांए बग़ैर तत्काल ईरान से बात शुरू करना चाहिए और समझौते को बचाना चाहिए क्योंकि ईरान से नए सिरे से वार्ता शुरू करना या ट्रम्प की तरह गतिरोध की स्थिति को आगे बढ़ाना अमरीका के हित में हरगिज़ नहीं है।

ट्रम्प परमाणु समझौते से निकल गए और उन्होंने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए तो ईरान इस नतीजे पर पहुंच गया कि उसे परमाणु समझौते का पालन रोक देना चाहिए। इसके नतीजे में ईरान के पास संवर्धित यूरेनियम का इतना बड़ा भंडार एकत्रित हो गया कि अगर वह चाहे तो परमाणु बम बना सकता है। अब अगर बाइडन भी वर्तमान स्थिति को जारी रखते हैं तो ईरान अपने दूसरे परमाणु कार्ड खेल सकता है।

ट्रम्प ने जो कार्यशैली अपनाई उससे अमरीका की विश्वस्नीयता सारी दुनिया में ध्वस्त हो गई और ईरान के बारे में अमरीका जिस आम सहमति के लिए लंबे समय से कोशिश में लगा हुआ था वह ख़त्म हो गई। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि इस समय ईरान के मामले में अमरीका किसी भी अन्य दौर से ज़्यादा कमज़ोर है।

बाइडन अगर इसी समय परमाणु समझौते को बहाल कर लेते हैं तो उनके लिए बहुत अच्छा होगा क्योंकि उन्हें राष्ट्रपति रूहानी की सरकार से वार्ता करनी होगी जो परमाणु समझौते की समर्थक है और कई बार कह चुकी है कि अगर अमरीका इस समझौते में वापस आ जाता है तो वह परमाणु समझौते का अतीत की तरह व्यापक रूप से पालन करना शुरू कर देगी। अगर बाइडन देरी करते हैं और रूहानी सरकार का टर्म पूरा होने के बाद नई सरकार बन जाती है तो बाइडन के लिए रास्ता और भी कठिन हो जाएगा और हो सकता है कि उन्हें सईद जलीली जैसे किसी नेता से बात करनी पड़े जिनकी अमरीका के बारे में बहुत कठोर नीतियां होंगी।

स्रोतः अलमयादीन

टैग्स

कमेंट्स