Sep २६, २०२० १०:३८ Asia/Kolkata
  • ट्रम्प प्रशासन ने ईरान में उपद्रव फैलाने वाले संगठनों की रोकी आर्थिक सहायता, क्या अपने मिशन से मायूस हो रहा है वाशिंग्टन?

ट्रम्प प्रशासन ने ईरान में उपद्रव फैलाने और समय समय पर सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों पर हमले करने वाले एजेंटों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोक दी है। 2 करोड़ डालर की यह सहायता ईरान, बेलारूस और हांगकांग में हंगामे मचाने संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाने वाले संगठनों को लोकतंत्र का प्रसार करने के नाम पर दी जाती थी।

ट्रम्प की ओर से नियुक्त किए गए मिकाइल पैक ने जो गत जून से यूएस एजेंसी फ़ार ग्लोबल मीडिया का प्रभार संभाल रहे हैं कांग्रेस से पारित फ़ंड रोक दिया। फ़ंड रुक जाने के बाद संबंधित संस्थाएं ईरान, हांगकांग और बेलारूस में अपनी गतिविधियां बंद करने पर मजबूर हो गई हैं।

पैक के कार्यालय का कहना है कि फंड इसलिए रोक दिया गया है कि एजेंटों ने ज़ूम तथा दूसरे साफ़्टवेयर और एप्लीकेशन प्रयोग करने में उतनी सावधानी नहीं बरती जितनी उन्हें बरतनी चाहिए थी।

विदेशों में सक्रिय एजेंटों की मदद करने वाली अमरीकी संस्था ओटीएफ़ के प्रमुख और पूर्व अमरीकी राजदूत कारेन कोर्नब्लू को यह चिंता है कि फ़ंड रुक जाने से एजेंटों को नुक़सान पहुंचेगा और विदेशों में लोकतंत्र को मज़बूत करने का मिशन प्रभावित होगा।

अमरीकी मिशन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं में अब यह बहस छिड़ गई है कि अमरीका जान बूझ कर बहाने कर रहा है और वह अपने पुराने एजेंटों को अकेला छोड़ देना चाहता है।

पैक पर यह आरोप है कि उन्होंने जून महीने से पद संभालने के बाद पूरे मिशन को कमज़ोर किया है और सारे प्लेटफ़ार्म वह ट्रम्प प्रशासन की प्रशंसा के लिए प्रयोग कर रहे हैं।

पर्यवेक्षक मानते हैं कि ट्रम्प प्रशासन के भीतर यह सोच मज़बूत हो रही है कि वह संस्थाएं जो अलग अलग नामों से विदेशों में अमरीकी हितों के अनुसार प्रदर्शन करने, हिंसा फैलाने और हालात ख़राब करने के लिए सक्रिय थीं अब कमज़ोर नज़र आ रही हैं। जैसे ईरान के ख़िलाफ़ सक्रिय संगठनों और तत्वों के बारे में कहा जाता है कि वह ईरान में इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करने में नाकाम रहे। इसलिए यह साबित हो चुका है कि इन संगठनों से ज़्यादा उम्मीद लगाना समय और पैसा बर्बाद करना है।

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