Oct २१, २०२० १७:०९ Asia/Kolkata
  • ईरानी जनता और नेतृत्व के लिए यह जश्न मनाने का समय है क्योंकि उन्होंने दुनिया की बड़ी ताक़तों को पराजित किया है

ईरान पर लगा हथियार प्रतिबंध हट चुका है। अमरीका संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के इस प्रतिबंध की अवधि बढ़वाने की अपनी दो कोशिशों में नाकाम रहा।

हमने देखा कि अमरीका के यूरोपीय घटक देशों ने भी उसे अकेला छोड़ दिया। यह ईरानी जनता और वहां के नेतृत्व की दृढ़ता का प्रतिफल है।

ईरानी राष्ट्र को 13 साल के संयम के बाद अब यह सफलता मिली तो हमें साफ़ दिखाई दिया कि इस्राईलियों और अमरीकियों के बीच बेचैनी फैल गई। वजह यह है कि अब ईरान एक ओर रूस से सोख़ोई-30 और सोख़ोई-35 जैसे युद्धक विमान, कामबैट हेलीकाप्टर और चीन से भी युद्धक विमान जी-10 और आधुनिक टैंक ख़रीद सकता है। जबकि दूसरी ओर अब ईरान अपने आधुनिक मिसाइल, तेज़ रफ़तार युद्धक नौकाएं दूसरे देशों को बेच सकता है। इससे ईरान को तेल की दौलत से हटकर आमदनी का एक महत्वपूर्ण साधन मिल जाएगा।

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने वैसे तो एलान किया है कि अगर किसी भी देश ने ईरान से व्यापार किया तो उस पर अमरीका प्रतिबंध लगा देगा। उधर इस्राईल के युद्ध मंत्री बेनी गांट्स ने कहा कि हम ईरान के शस्त्रागार में विस्तार को रोकेंगे और अपने पुराने और नए घटकों के साथ मिलकर ईरान के प्रयासों पर अंकुश लगाएगा।

यह धमकियां खोखली नज़र आती हैं और ज़मीनी स्तर पर इनका बहुत सीमित असर दिखाई देगा क्योंकि ईरान अगर युद्धक विमान और रक्षा तकनीक ख़रीदेगा तो माली या श्रीलंका जैसे किसी देश से नहीं बल्कि रूस और चीन जैसे उभरते सुपर पावर देशों से ख़रीदेगा। इन दोनों ही देशों पर अमरीका प्रतिबंध लगा चुका है मगर इन प्रतिबंधों का इन दोनों देशों पर बहुत सीमित असर हुआ।

इस्राईली धमकी की बात की जाए तो वह कम से कम पिछले बीस साल से यही धमकी दे रहा है कि ईरान पर हमला कर देगा और ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा मगर अब तक वह इस हमले की हिम्मत नहीं जुटा सका है क्योंकि उसे यक़ीन है कि ईरान का जवाबी हमला बेहद विध्वंसकारी होगा।

ईरान पर 2007 से लगे इन प्रतिबंधों ने एक प्रकार से इस देश को वह फ़ायदा पहुंचा दिया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। ईरान ने प्रतिबंधों के कारण अपनी आंतरिक क्षमताओं को विकसित करने पर काम किया तो बड़े कारगर आधुनिक मिसाइल और ड्रोन विमानों सहित महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण बना रहा है। ईरान अपने मिसाइल की मदद से अपना सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंचा चुका है जबकि अपनी मिसाइल से उसने अमरीका का अत्याधुनिक ग्लोबल हाक ड्रोन विमान मार गिराया। आधुनिक युद्धक नौकाओं, टैंकों और पनडुब्बियों की बात की जाए तो ईरान ने इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

रूस इससे पहले प्रतिबंधों को धता बताते हुए ईरान को एस-300 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम बेच चुका है तो अब एस-400 सिस्टम बेचने में भी नहीं हिचकिचाएगा। चीन तो ईरान के साथ 400 अरब डालर कर स्ट्रैटैजिक सहयोग का समझौता कर रहा है जिसके तहत दोनों देशों के बीच लगभग 100 समझौते होंगे।

इस्राईल के युद्ध मंत्री बेनी गांट्स के साक्षात्कार में जो बिंदु सबसे महत्वपूर्ण है वह यह है कि ईरान की सैनिक शक्ति के विस्तार को इस्राईल अपने पुराने और नए घटकों के साथ मिलकर रोकेगा। पुराने घटकों को तो सब जानते हैं नए घटकों में इमारात और बहरैन हैं जिन्होंने इस्राईल के साथ समझौता किया है और हो सकता है कि सऊदी अरब भी इसी समूह में शामिल हो जाए।

मगर यह तय है कि ईरान पर लगा हथियारों का प्रतिबंध हटा है तो अमरीका, इस्राईल और उनके घटकों पर बौखलाहट छा गई है। ईरान की जनता और नेतृत्व को जश्न मनाने का पूरा अधिकार है क्योंकि यह उनके लंबे प्रतिरोध और मज़बूत संयम शक्ति का फल है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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