Oct २२, २०२० १९:०१ Asia/Kolkata
  • क्या आयतुल्लाह ख़ामेनई ने इराक़ में अमरीकी हितों पर हमले रोकने के दिए आदेश? मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट की क्या हक़ीक़त है?

लंदन स्थित वेबसाइट मिडिल ईस्ट आई ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें यह दावा किया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला ख़ामेनई ने इराक़ के ताक़तवर संगठनों को आदेश दिया है कि वह फ़िलहाल अमरीकी हितों पर हमले रोक दें।

इराक़ में हालिया दिनों अमरीकी दूतावास और अमरीकी सैनिकों के लोजिस्टिक कारवानों पर लगभग रोज़ाना हमले हो रहे थे जिसे देखते हुए अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने इराक़ी सरकार से कहा था कि अगर हमले बंद न हुए तो अमरीका बग़दाद में अपना दूतावास बंद कर देगा।

इन हमलों में कोई बड़ा जानी नुक़सान तो नहीं होता मगर अमरीकी सैनिकों को यह संदेश ज़रूर जाता है कि वह हर लमहा इराक़ी संगठनों के निशाने और रहमो करम पर हैं।

मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर ने इराक़ी प्रधानमंत्री मुसतफ़ा अलकाज़ेमी को कुछ समय देने के उद्देश्य से हमले रुकवाए हैं। इस अवधि में वह इराक़ के हालात को संभालने की कोशिश करेंगे जो तेल की आमदनी में आने वाली भारी गिरावट के कारण अनेक प्रकार के संकटों से जूझ रहा है। आयतुल्लाह ख़ामेनई के आदेश के बाद इराक़ी हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड और अलनोजबा ब्रिगेड सहित कई संगठनों ने अपने हमले रोक दिए हैं।

वैसे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आगामी तीन नवंबर के चुनावों को देखते हुए ट्रम्प प्रशासन को यह डर है कि इराक़ में अमरीकियों पर होने वाले हमलों से कहीं चुनाव जीतने की उनकी कोशिश को आघात न पहुंच जाए इसलिए उन्होंने इराक़ी सरकार से अनुरोध किया है कि वह किसी तरह ईरान द्वारा समर्थित संगठनों को हमले रोकने के लिए तैयार करे। क्योंकि अगर यह हमले जारी रहे और ट्रम्प सरकार जवाबी कार्यवाही करने पर मजबूर हो गई तो वह विदेशों के झगड़ों से अमरीका को मुक्ति दिलाने के अपने दावों को अपने हाथ से ग़लत साबित कर देगी।

इराक़ी नेताओं का कहना है कि ईरान का रुख़ परिवर्तित करने में ब्रिटेन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ब्रिटिश सरकार ने ईरान को इस बात पर तैयार किया है कि बुरी तरह हताश हो चुके ट्रम्प को इस स्टेज पर ज़्यादा परेशान न किया जाए।

जनरल हेजाज़ी

 

दूसरी ओर ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के वरिष्ठ कमांडर जनरल हेजाज़ी ने एक इंटरव्यू में एक बात कही जो इस संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है और इराक़ में अमरीकियों की हालत को समझने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया है कि अब अमरीका पहले से अधिक सुरक्षित हो गया है तो सवाल यह है कि अगर अमरीका अधिक सुरक्षित हो गया है तो अपनी छावनियों के भीतर आज अमरीकी सैनिक क्यों कांपते हैं और ईरान के सामने बार बार यह अनुरोध क्यों कर रहे हैं कि ईरान उन्हें थोड़ी मोहलत और दे दे?

इससे यह नतीजा निकलता है कि अमरीकी अधिकारियों ने ईरान को यह आश्वासन दिलाने की कोशिश की है कि वह इराक़ से अपने सैनिकों को ज़रूर बाहर निकाल लेंगे मगर ईरान इसके लिए उन्हें कुछ समय और दे दे।

ईरान भी बार बार कह चुका है कि शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या का इंतेक़ाम यह होगा कि अमरीका इराक़ से बाहर निकले।

स्रोतः एजेंसियां  

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