Nov १३, २०२० १०:३९ Asia/Kolkata
  • सैयद हसन नसरुल्लाह ने दिए तीन बड़े संदेश... ईरान और हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर अमरीकी हमले की आशंका जताई...सऊदी नरेश ने अचानक ईरान पर क्यों लगाए गंभीर आरोप

हिज़्बुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में तीन बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। यह भाषण उन्होंने बुधवार की शाम शहीद दिवस के उपलक्ष्य में दिया।

-1 चुनाव हार चुके डोनल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान और हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर आने वाले दो महीनों के भीतर हमले की आशंका है। ट्रम्प अपने रक्षा मंत्री मार्क एस्पर को बर्ख़ास्त कर चुके हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वह इस प्रकार की योजनाओं के विरोधी थे। सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि प्रतिरोधक मोर्चे को इस प्रकार के किसी भी हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह एलर्ट रहना चाहिए।

-2 लेबनान के सीमावर्ती इलाक़े नाक़ूरा में इस्राईली सैनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ लेबनान के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता, सीमाओं के निर्धारण के लिए हो रही है मगर इसका मतलब इस्राईल से संबंधों की स्थापना हरगिज़ नहीं है। हिज़्बुल्लाह और सीरिया किसी भी तरह इस्राईल से संबंध स्थापित किए जाने पक्ष में नहीं हैं। इस बारे में जो अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं वह सब निराधार हैं।

-3 विदेश मंत्री जिबरान बासिल ने अमरीका की ओर से डाले जाने वाले हर दबाव को ख़ारिज कर दिया। अमरीका ने उनके सामने दो विकल्प रखे थे। एक यह कि हिज़्बुल्लाह से अपने हर तरह के संबंध समाप्त कर दें और दूसरा विकल्प यह कि अमरीकी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार हो जाएं। इस पर उन्होंने साफ़ कहा कि हिज़्बुल्लाह से संबंध हरगिज़ समाप्त नहीं किए जा सकते।

हमें जिस बारे में बात करनी है वह पहला संदेश है यानी ट्रम्प अपने बचे हुए कुछ दिनों के राष्ट्रपति काल में ईरान या हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर कोई हमला कर सकते हैं। ख़ास तौर पर इसलिए भी कि इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू भी इन दिनों ट्रम्प जैसी ही परिस्थितियों में फंसे हुए हैं और इस बात की पूरी संभावना बन गई है कि उन्हें जेल की हवा खानी पड़ जाए। अभी हाल ही में नेतनयाहू के आदेश पर लेबनान और सीरिया की सीमा के क़रीब इस्राईली सेना ने अभ्यास भी किया है जिसे देखते हुए हिज़्बुल्लाह और सीरियाई सेना पूरी तरह एलर्ट हैं।

इस प्रकार के अनुमानों को न्यूयार्क टाइम्ज़ की उस रिपोर्ट से भी बल मिलता है जिसमें पेंटागोन के वरिष्ठ अधिकारियों की गहरी चिंता के बारे में बताया गया है कि वह रक्षा मंत्री एस्पर के हटने के बाद बहुत विचलित हैं।

 

ट्रम्प और नेतनयाहू दोनों जानते हैं कि जो बाइडन मध्यपूर्व के बारे में अमरीका की नीतियों पर ज़रूर पुनरविचार करेंगे और ईरान के साथ किए गए परमाणु समझौते में भी ज़रूर लौटना चाहेंगे जिसके बाद ईरान पर लगे प्रतिबंध कम हो जाएंगे और ईरान एक बार फिर वैश्विक तेल मंडियों में पूरी शक्ति के साथ लौटेगा।

इस्राईल ह्योम अख़बार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कहा गया है कि ज़ायोनी शासन इस समय कई अरब देशों के साथ मिलकर हिज़्बुल्लाह आंदोलन को आतंकी संगठनों की सूचि में शामिल करवाने पर काम कर रहा है। अब तक दुनिया के 14 देश हैं जो हिज़्बुल्लाह को आतंकी संगठन मानते हैं।

जैसे ही ईरान पर लगे प्रतिबंध हटे या कम हुए तय है कि हिज़्बुल्लाह की ताक़त में तेज़ी से विस्तार होगा। यही नहीं यमन, इराक़ और फ़िलिस्तीन में भी ईरान समर्थक संगठनों की ताक़त बढ़ेगी। शायद यही वजह थी कि सऊदी अरब के नरेश ने बुधवार को मजलिसे शूरा की बैठक को संबोधित करते हुए विश्व समुदाय से अपील की कि महाविनाश के हथियार और बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने की ईरान की कोशिशों का कोई बुनियादी समाधान निकालने के लिए क़दम उठाए और ईरान का एजेंडा बहुत ख़तरनाक है।

 

ईरान के कथित महाविनाश के हथियार और मिसाइल कार्यक्रम के बुनियादी समाधान का एक ही मतलब है कि ईरान के प्रतिष्ठानों पर हमला कर दिया जाए।  हमें यक़ीन है कि सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने यह बयान बुरी तरह आहत अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के इशारे पर दिया है।

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो अरब देशों के दौरे पर आ रहे हैं जिसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य इन देशों को ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी साज़िश के तहत अलग अलग भूमिकाएं और ज़िम्मेदारियां देना हो सकता है। सऊदी अरब और इमारात उनके इस दौरे के महत्वपूर्ण पड़ाव होंगे। पोम्पेयो ट्रम्प के बहुत क़रीब हैं और नेतनयाहू के बड़े समर्थक माने जाते हैं जबकि ईरान और हिज़्बुल्लाह से उन्हें ख़ास दुशमनी है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए!

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए

 

टैग्स