Nov २९, २०२० १२:१४ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? क्यों तुम लोग मूल्यहीन प्रतिमाओं को सर्वसमर्थ व शक्तिशाली ईश्वर के साथ पुकराते हो और उन्हें अपने तथा संसार के संचालन में प्रभावी समझते हो?

हवाएं, जो समुद्रों पर से बादलों को धरती के दूरस्थ स्थानों तक ले जाती हैं और वर्षा का कारण बनती हैं, ईश्वर के अलावा किसकी इच्छा और इरादे से चलती हैं?

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 63 का अनुवाद:

क्या (तुम्हारे द्वारा ठहराए गए ईश्वर के समकक्ष बेहतर हैं) या वह जो थल और जल के अंधेरों में तुम्हारा मार्गदर्शन करता है और जो अपनी दया (की वर्षा) के आगे हवाओं को शुभ सूचना बनाकर भेजता है? क्या ईश्वर के साथ कोई और पूज्य है? ईश्वर उससे उच्च है जो वे किसी को उसका समकक्ष ठहराते हैं?

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

धरती व आकाश में सुव्यवस्थित और संगठित वस्तुएं, सृष्टि के एक निर्धारित कार्यक्रम का पता देती हैं।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. धरती व आकाश में सुव्यवस्थित और संगठित वस्तुएं, सृष्टि के एक निर्धारित कार्यक्रम का पता देती हैं ।
  2. यह काम ब्रह्मांड के रचयिता के अतिरिक्त किसी और के बस का नहीं है।

  3. कोई भी व्यक्ति या वस्तु ऐसी स्थिति में नहीं है कि उसका नाम ईश्वर के साथ पुकारा जाए क्योंकि ईश्वर हर चीज़ से उच्च है।

     

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