Dec ०१, २०२० १५:०१ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? प्रलय का आना निश्चित है लेकिन किसी को उसके समय का ज्ञान नहीं है।

कुछ बातें ईश्वर से विशेष हैं और पैग़म्बरों व फ़रिश्तों तक को उनके बारे में कोई ज्ञान नहीं है।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 65 व 66 का अनुवाद:

(हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि आकाशों और धरती में जो भी गैब अर्थात छिपा हुआ है, ईश्वर के सिवा किसी को भी उस का ज्ञान नहीं है और न उन्हें यह पता है कि वे कब उठाए जाएँगे। बल्कि प्रलय के बारे में उनका ज्ञान समाप्त हो गया है, बल्कि ये उसकी ओर से कुछ संदेह में है, बल्कि (ये) उसे (समझने में अक्षम व) अंधे हैं।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

किसी भी मनुष्य को यह नहीं पता है कि वह कब मरेगा लेकिन सभी को इस बात का विश्वास है कि वे एक दिन मर जाएंगे और इससे बचने का कोई मार्ग नहीं है।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. प्रलय सहित धार्मिक आस्थाओं के बारे में संदेह उत्पन्न करना विरोधियों के कार्यक्रमों में से एक है।
  2. इस लिए मुसलमानों को  इस संबंध में तर्कसंगत उत्तर पेश करने चाहिए।

  3. प्रलय पर ईमान भी सृष्टि पर ईमान की तरह ऐसी बातों में से है जिन्हें इंद्रियों द्वारा महसूस नहीं किया जा सकता और बुद्धि केवल तर्कों से इसे सिद्ध कर सकती है।

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