Dec ०१, २०२० १४:३६ Asia/Kolkata
  • क्या बाइडन ईरान के वैज्ञानिक की हत्या के बाद परमाणु समझौते में वापसी करेंगे?

इस्राईली अख़बार जेरुज़लम पोस्ट का कहना है कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन को खुला संदेश दे रहे हैं कि 2015 के ईरान परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी का वह खुलकर विरोध करेंगे।

अख़बार ने अपने एक लेख में लिखा कि यह तो स्वाभाविक है कि बाइडन की सरकार ट्रम्प की अधिकतर नीतियों का विरोध करेगी मगर जहां तक ईरान का मामला है तो इस्राईल यह चाहता है कि अमरीका अधिकतम दबाव की नीति जारी रखे।

नेतनयाहू ने पिछले सप्ताह एक कार्यक्रम में कहा कि ईरान के परमाणु समझौते में हरगिज़ वापस मत लौटिए। नेतनयाहू के लिए यह सहन कर पाना संभव नहीं होगा। गत शुक्रवार को वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक फ़ख़्रीज़ादे की हत्या करके यही संदेश बाइडन और ईरान दोनों को दिया गया है।

इस्राईल ने ट्रम्प की सत्ता के बचे हुए चंद दिनों का फ़ायदा उठाते हुए यह टारगेट किलिंग की है क्योंकि उसे पता है कि अब इस प्रकार का मौक़ा दोबारा हाथ आना कठिन होगा। इस प्रकार की हत्या के लिए बड़ी सटीक इंटैलीजेन्स जानकारियों की ज़रूरत होती है। यह तो सबको याद होगा कि 2018 में नेतनयाहू ने तेहरान के परमाणु आरकाइव की जानकारियां चुराई थीं और प्रेस कान्फ़्रेन्स में परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे का नाम लेते हुए कहा था कि इस नाम को अच्छी तरह याद रखिए।

हो सकता है कि इस नाम पर पिछले हफ़्ते सऊदी अरब के नियोम में मुहम्मद बिन सलमान, माइक पोम्पेयो, नेतनयाहू और यूसी कोहेन की बैठक में भी चर्चा हुई हो।

इस्राईल ने शुरू से ईरान के परमाणु समझौते का विरोध किया। बात इतनी आगे बढ़ गई कि नेतनयाहू ने बाराक ओबामा को भी नाराज़ कर दिया और उनके समन्वय के बग़ैर अमरीकी कांग्रेस में जाकर भाषण दिया। वर्ष 2018 में ट्रम्प इस समझौते से निकल गए और ईरान के बारे में अधिकतम दबाव की नीति अपना ली।

बाइडन 20 जनवरी को सत्ता संभालेंगे। वह कह चुके हैं कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते का दोबारा पूरी तरह पालन शुरू कर दिया तो अमरीका इस समझौते में लौट आएगा। मगर बाइडन को चाहिए कि अब इस समझौते में इतना संशोधन कर दें कि ईरान के हाथ बंध जाएं और उसके परमाणु कार्यक्रम के साथ ही मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में विस्तृत होती पैठ पर भी रोक लग जाए।

जेरुज़लम पोस्ट के सुझाव तो अपनी जगह मगर ईरान यह बात साफ़ कर चुका है कि वह मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में अपने बढ़ते प्रभाव के बारे में अमरीका या किसी भी अन्य पक्ष से कोई वार्ता नहीं करेगा।

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