Dec ०२, २०२० ११:२१ Asia/Kolkata
  • वाशिंग्टन पोस्टः सवाल यह नहीं कि ईरानी वैज्ञानिक की हत्या इस्राईल ने की है, बल्कि सवाल यह है कि क्यों?

अमरीका के अख़बार वाशिंग्टन पोस्ट ने इस्राईल में अपने दो संवाददाताओं की एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें स्टिफ़ हैंडरिक्स और शीरा राबिन ने लिखा है कि ईरान के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या के बाद इस्राईल के सरकारी सूत्रों ने इस पर कोई कमेंट करने से इंकार किया लेकिन इस्राईली टीकाकारों के बीच यह विचार आम हो गया कि यह टारगेट किलिंग इस्राईल का ही काम है।

इसके साथ ही इस्राईली टीकाकारों में यह बहस छिड़ गई कि प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू क्या लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं?

इस्राईली टीकाकारों के बीच इस बारे में कई प्रकार के क़यास लगाए जा रहे हैं। सबसे पहला विचार तो यही सामने आया कि नेतनयाहू ने इस तरह ईरान को इंतेक़ाम की कार्यवाही पर मजबूर किया है क्योंकि जब ईरान कोई सैनिक हमला करेगा तो अमरीका को ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले का बहाना मिल जाएगा और ट्रम्प के वाइट हाउस से जाने से पहले ही यह काम अंजाम दे दिया जाएगा।

दूसरा विचार यह पेश किया जा रहा है कि इस्राईली प्रधानमंत्री चाहते हैं कि ईरान के साथ अमरीका के संबंधों के दायरे में जो सुधार और बदलाव बाइडन करना चाहते हैं उसका रास्ता पहले ही बंद कर दिया जाए।

इस्राईली टीकाकारों के बीच तीसरा विचार यह है कि नेतनयाहू ने फ़ख्रीज़ादे की हत्या के लिए बहुत अच्छा मौक़ा देखा तो इसका तत्काल फ़ायदा उठा लिया क्योंकि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का आधार समझे जाने वाले वैज्ञानिक थे और इस्राईल की हिट लिस्ट पर थे। नेतनयाहू को यह अंदाज़ा था कि ईरान इस टारगेट किलिंग का बदला लेने के बजाए संयम से काम लेगा।

इस क़त्ल के लिए जो शैली अपनाई गई उसमें कई महीनों का समय लगता है और जैसे ही यह तैयारी पूरी हुई नेतनयाहू ने परिणामों की चिंता किए बग़ैर परमाणु वैज्ञानिक की हत्या का आदेश दे दिया।

शुक्रवार के बाद से अब तक ईरान की ओर से कोई इंतेक़ाम न लिए जाने का यह मतलब है कि ईरान देखना चाहता है कि जो बाइडन के शासनकाल में अमरीका का क्या रुख़ होता है।

इस हत्या के पीछे जो भी उद्देश्य रहा हो मगर यह तो तय है कि अब अमरीकी विदेश मंत्रालय के सामने बड़ा दुर्गम रास्ता है और यह संदेश दिया गया है कि इस्राईल अरब देशों के साथ मिलकर जो बाइडन और ईरान का मुक़ाबला करेगा।

ईरान के लिए यह संदेश है कि दुशमनों की एक दीवार उसके सामने खड़ी है और अमरीका की नई सरकार के लिए यह संदेश है कि ईरान के मामले में इस्राईल और अरब देशों की बात अमरीका को माननी होगी।

स्रोतः वाशिंग्टन पोस्ट

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