Dec ०२, २०२० १५:१९ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? सभी पैग़म्बरों ने वादा किया है कि एक दिन प्रलय आएगा जबकि हमारे जो पूर्वज इस संसार से जा चुके हैं वे मिट्टी बन गए हैं।

पिछले लोगों के अवशेषों की रक्षा, आगामी पीढ़ियों के पाठ के लिए आवश्यक है।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 67, 68 व 69  का अनुवाद:

और काफ़िरों ने कहाः क्या जब हम और हमारे बाप-दादा (मर कर) मिट्टी हो जाएँगे तो क्या वास्तव में हम (क़ब्र से जीवित करके) निकाले जाएँगे? वस्तुतः इससे पहले भी इस (प्रकार) का वादा हमसे और हमारे बाप-दादा से किया जा चुका है। यह तो बस पिछले लोगो की कहानियोँ के अतिरिक्त कुछ नहीं है। (हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि धरती में घूमो-फिरो और देखो कि अपराधियों का कैसा परिणाम था?

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

क़ुरआने मजीद लोगों को पिछली जातियों के इतिहास के अध्ययन का निमंत्रण देता है और उनसे कहता है कि वे अत्याचारियों का अंजाम देखने के लिए धरती के विभिन्न स्थानों की यात्रा करें क्योंकि अत्याचारियों की बची हुयी निशानियों का अध्ययन, मनुष्य के प्रशिक्षण व प्रगति का कारण है।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. आसमानी किताबों को क़िस्सा-कहानी बताना कोई नई बात नहीं है, इतिहास के अनुसार यह सदा ही विरोधियों की शैली रही है।
  2. खेद की बात है कि आज भी कुछ लोग अपने अज्ञान के कारण और कुछ लोग जान बूझ कर आसमानी किताब की उच्च शिक्षाओं को कहानी बताते हैं।

  3. क़ुरआने मजीद लोगों को पिछली जातियों के इतिहास के अध्ययन का निमंत्रण देता है और उनसे कहता है कि वे अत्याचारियों का अंजाम देखने के लिए धरती के विभिन्न स्थानों की यात्रा करें क्योंकि अत्याचारियों की बची हुयी निशानियों का अध्ययन, मनुष्य के प्रशिक्षण व प्रगति का कारण है।

  4. पिछले लोगों के अवशेषों की रक्षा, आगामी पीढ़ियों के पाठ के लिए आवश्यक है।

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