Dec ०३, २०२० ०९:३५ Asia/Kolkata
  • बाइडन ने रूहानी और उनकी टीम को दिया संदेश...हम परमाणु समझौते में लौटेंगे...मगर लगता है कि अब देर हो चुकी है? क्या टारगेट किलिंग की और भी घटनाएं हो सकती हैं?

अमरीका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने न्यूयार्क टाइम्ज़ अख़बार के माध्यम से ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी को महत्वपूर्ण संदेश भेजा है कि हम परमाणु समझौते में लौट रहे हैं क्योंकि यह समझौता न होगा तो इलाक़े के देश यानी सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र भी परमाणु दौड़ में लग जाएंगे जिसके ख़तरनाक परिणाम होंगे।

यह संदेश आनन फ़ानन में उस समय तैयार किया गया जब परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या से ईरान को गहरा आघात लगा है और वह इस टारगेट किलिंग के जवाब में सारे मोर्चों पर एक साथ कार्यवाही करने की तैयारी कर रहा है।

इस संदेश के कई ख़तरनाक पहलू हैं।

-1 बाइडन ने कहा है कि परमाणु समझौते में वापसी के साथ ही कई विषयों पर वार्ता शुरू होगी जिनमें एक ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों का मुद्दा है।

-2 वार्ता में दूसरे देशों जैसे सऊदी अरब और इमारात को शामिल किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्षेत्र के देशों की भी निगरानी का रास्ता खुले जाएगा।

-3 ईरान में संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन पर सीमितताओं की अवधि में दस साल से अधिक का विस्तार किया जाएगा।

-4 ईरान से यह आश्वासन लिया जाएगा कि वह यमन, सीरिया, लेबनान, इराक़ और फ़िलिस्तीन में अपने घटकों की राजनैतिक और आर्थिक मदद न करे।

ईरान के लिए यह संभव ही नहीं है कि अमरीका की इन शर्तों में से कोई भी शर्त स्वीकार कर ले क्योंकि इसका मतलब ईरान की क्रांति की रास्ते को छोड़ना और ईरान को बेअसर देश बना देना है। कुछ ही दिन पहले ईरान की संसद ने परमाणु वैज्ञानिक फ़ख़्रीज़ादे की हत्या का इंतेक़ाम लेने का बिल पास किया है। साथ ही यूरेनियम का संवर्धन 20 प्रतिशत से अधिक ग्रेड तक बढ़ाने का बिल भी पास किया गया है और ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण से अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को रोकने का बिल भी सदन में पास हुआ है।

बाइडन शायद यह भूल रहे हैं कि ईरान के मिसाइलों का मामला हो या परमाणु गतिविधियों पर सीमितताओं की अवधि बढ़ाने का विषय हो इसके लिए दो चीज़ों की ज़रूरत होगी। एक तो ईरान की संसद की स्वीकृति और दूसरे सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई की सहमति है।  दूसरी बात यह है कि ईरान में राष्ट्रपति चुनाव बहुत क़रीब आ चुके हैं। मई में यह चुनाव होने हैं यानी बाइडन के सत्ता संभालने के चार महीने बाद ईरान में नया राष्ट्रपति देश की बागडोर संभालेगा। हमें नहीं लगता कि चार महीने का समय इतने संवेदनशील मुद्दों पर वार्ता के लिए पर्याप्त होगा। इस अवधि के बाद ईरान में नया राष्ट्रपति होगा और हमें नहीं लगता कि नया राष्ट्रपति उस धड़े से होगा जिससे डाक्टर रूहानी का संबंध है।

आयतुल्लाह ख़ामेनई परमाणु समझौते के विरोधी थे और समझौते से ट्रम्प के निकल जाने के बाद उनका विरोध और बढ़ गया है।

ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका और इस्राईल के हमले की आशंका बनी हुई है तो दूसरी ओर वैज्ञानिक फ़ख़्रीज़ादे की हत्या पर ईरान का इंतेक़ाम भी निश्चित है। यह इंतेक़ाम दर्दनाक और बहुत योजनाबद्ध होगा।

इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू के पास अब कुछ हफ़्तों का ही समय बचा है जिसमें वह ईरान के ख़िलाफ़ अपनी विनाशकारी योजना पर अमल कर सकते हैं क्योंकि इस्राईल में पुनः चुनाव होने जा रहे हैं और इस्राईल की सत्ता में बने रहने और सुन्नी अरब देशों का नेतृत्व संभालने का नेतनयाहू का सपना ध्वस्त हो सकता है क्योंकि चुनाव हारने की स्थिति में भ्रष्टाचार के कई मामलों में वह जेल जा सकते हैं। ट्रम्प प्रशासन के अधिकारी लगातार पश्चिमी एशिया के देशों का दौरा कर रहे हैं ताकि बाइडन प्रशासन को शुरू में ही संकट में झोंक दें। इसलिए हमें यह आशंका है कि आने वाले दिनों में टारगेट किलिंग और सीमित स्तर के हमलों की घटनाएं हो सकती हैं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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