Dec ०५, २०२० ११:५९ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? ईश्वर ने मनुष्य को स्वतंत्र व स्वाधीन पैदा किया है और वह नहीं चाहता कि कोई भी विवश हो कर ईमान लाए।

धरती के विभिन्न भागों का भ्रमण करें ताकि पिछली जातियों की तबाही और उनकी सभ्यताओं की समाप्ति देखें और उनके अंजाम से पाठ लें।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 70 से 72 का अनुवाद:

(हे पैग़म्बर!) उन (के पथभ्रष्ट होने) पर शोकाकुल न हों और जो चाल वे चल रहे हैं, उस पर भी दुखी न हों। और वे कहते हैं कि यदि तुम सच्चे हो तो यह (दंड का) वादा कब पूरा होगा? कह दीजिए कि जिसकी तुम जल्दी मचा रहे हो संभव है कि उसका कोई भाग तुम्हारे पीछे ही लगा हो।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

काफ़िरों और अत्याचारियों को ईश्वर ने जो ढील दे रखी है उसका यह कारण नहीं है कि ईश्वर उन्हें भूल गया है बल्कि कभी न कभी उन्हें उनके ग़लत कामों की सज़ा ज़रूर मिलेगी।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. पथभ्रष्ट लोगों के साथ हमदर्दी की एक सीमा है, उनके मार्गदर्शन की कोशिश करनी चाहिए लेकिन अगर वे सत्य को समझने के बावजूद असत्य पर आग्रह करते रहे तो फिर उन्हें उनकी स्थिति पर छोड़ देना चाहिए और दुखी नहीं होना चाहिए।
  2. काफ़िरों और अत्याचारियों को ईश्वर ने जो ढील दे रखी है उसका यह कारण नहीं है कि ईश्वर उन्हें भूल गया है बल्कि कभी न कभी उन्हें उनके ग़लत कामों की सज़ा ज़रूर मिलेगी।

     

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