Dec ०७, २०२० १३:२३ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? न केवल उनके मन और भीतर की सारी बातें बल्कि सृष्टि की सभी वस्तुओं की सभी प्रकट व गुप्त बातें ईश्वर के लिए पूरी तरह स्पष्ट हैं।

सृष्टि की व्यवस्था एक सुरक्षित किताब या दूसरे शब्दों में ईश्वर के असीम ज्ञान के अंतर्गत है और सृष्टि की हर चीज़ उसमें स्पष्ट रूप से लिखी हुई है।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 73 से 75 का अनुवाद:

निश्चय ही आपका पालनहार लोगों पर दया व कृपा करने वाला है किन्तु उनमें से अधिकतर कृतज्ञ नहीं हैं। और जो कुछ वे अपने सीनों में छिपाए हुए हैं और जो कुछ वे प्रकट करते हैं, उससे निश्चय ही आपका पालनहार भली-भाँति अवगत है। और आकाश व धरती में छिपी कोई भी (बात) ऐसी नहीं जो (ईश्वर के निकट) एक स्पष्ट किताब में मौजूद न हो।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

अगर ईश्वर तुम्हें दंडित करने में जल्दबाज़ी नहीं कर रहा है तो यह उसकी अक्षमता, निश्चेतना या भूल के कारण नहीं है बल्कि अपने बंदों पर यह उसकी दया व कृपा है कि वह उन्हें मोहलत और तौबा व प्रायश्चित का समय देता है लेकिन खेद की बात है कि वे न तो अपने पालनहार की इस महान दया पर ध्यान देते हैं और न ही उसके प्रति कृतज्ञ रहते हैं बल्कि वे अपने पिछले कर्मों को सुधारने के बजाए अपने ग़लत कामों पर अड़े रहते हैं।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. ईश्वर हमें जो मोहलत देता है उसका मूल्य समझना चाहिए और उससे तौबा व प्रायश्चित के लिए लाभ उठाना चाहिए।
  2. ईश्वर की ओर से दी गई मोहलत को अपने कर्मों के सही होने और स्वयं के, दंड का पात्र न होने का तर्क नहीं समझना चाहिए।

  3. ईश्वर हर चीज़ और हर बात से अवगत है, वह आकाशों की गुप्त बातों, मनुष्य के गुप्त कर्मों, प्रलय के आने के समय और अन्य सभी रहस्यों से अगवत है। इसी तरह पूरी सृष्टि उसकी दृष्टि में है और सभी का हिसाब किताब उसके पास सुरक्षित है।

  4. हमें न केवल अपने व्यवहार और कर्मों को सुधारना चाहिए बल्कि अपनी नीयतों को भी ठीक करना चाहिए।

  5. दूसरों की बुराई चाहने के बजाए उनके साथ भलाई के विचार में रहना चाहिए क्योंकि ईश्वर हमारे मन की बातों से अवगत है और उसी के आधार पर वह हमें दया व कृपा का पात्र बनाता है।

     

     

     

     

     

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