Dec ०८, २०२० १२:५८ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? क़ुरआने मजीद की एक विभूति वैचारिक मतभेदों का समाधान है।

क़ुरआन न केवल मुसलमानों के लिए बल्कि आसमानी किताबों के मानने वालों के लिए भी एकता का कारण है।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 76 से 79 का अनुवाद:

(निस्संदेह यह क़ुरआन बनी इसराईल से अधिकतर ऐसी बातें बयान करता है जिनके बारे में उनमें मतभेद है। और निस्संदह यह (क़ुरआन) ईमान वालों के लिए मार्गदर्शन और दया (का कारण) है। (हे पैग़म्बर!) निश्चय ही आपका पालनहार उनके बीच अपने आदेश से फ़ैसला कर देगा और वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली और जानकार है तो आप ईश्वर पर ही भरोसा कीजिए कि निश्चय ही आप स्पष्ट सत्य पर हैं।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

अगर क़ुरआने मजीद को स्वीकार कर लें तो उसकी आयतों के माध्यम से अपने मतभेदों को दूर कर सकते हैं।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. क़ुरआने मजीद की एक विभूति वैचारिक मतभेदों का समाधान है।
  2. क़ुरआन न केवल मुसलमानों के लिए बल्कि आसमानी किताबों के मानने वालों के लिए भी एकता का कारण है।
  3. अगर वे क़ुरआने मजीद को स्वीकार कर लें तो उसकी आयतों के माध्यम से अपने मतभेदों को दूर कर सकते हैं।
  4. मार्गदर्शन, ईश्वर की सबसे बड़ी अनुकंपाओं में से एक है जो ईश्वर ने अपनी दया व कृपा के माध्यम से मनुष्य को प्रदान किया है।

  5. ईश्वर पर भरोसा, मनुष्य की सफलता की शर्तों में से एक है।

  6. साथ ही यह बात भी याद रखनी चाहिए कि ईश्वर पर भरोसा ग़लत मार्ग पर नहीं बल्कि केवल सही मार्ग पर रह कर किया जा सकता है।

     

टैग्स