Dec १३, २०२० १२:२० Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? कुछ लोगों के इसी संसार में मरने के बाद जीवित होने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।

ईश्वर की इच्छा से इस संसार में मरने के बाद लोगों का जीवित होना ऐसी बात है जो इससे पहले भी सामने आ चुकी है और क़ुरआने मजीद ने उसकी ओर इशारा किया है।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 82 व 83 का अनुवाद:

और जब (प्रलय के निकट) उनके लिए (दंड की) बात निश्चित हो जाएगी तो हम उनके लिए धरती से एक जीव सामने लाएँगे जो उनसे बातें करेगा कि लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे। और जिस दिन हम प्रत्येक समुदाय में से, ऐसे लोगों का एक गुट, जो हमारी आयतों को झुठलाते हैं, एकत्र करेंगे। फिर उन्हें (इकट्ठा चलने के लिए) रोक दिया जाएगा।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

पूरे इतिहास के सबसे बड़े अत्याचारियों और काफ़िरों के एक गुट को भी ईश्वर जीवित करेगा ताकि वे सत्य व न्याय की वैश्विक सरकार में अपने कर्मों का सांसारिक दंड भुगतें।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. मरे हुए लोगों का जीवित होना, उन बातों में से है जो केवल प्रलय में ही नहीं बल्कि इस संसार में भी घट चुकी हैं और आगे भी घटती रहेंगी।
  2. इसमें शक करना, ईश्वर की शक्ति में शक करने के समान है।
  3. इस संसार का अंत ईमान वालों के सर्वश्रेष्ठ लोगों और इसी प्रकार सबसे बड़े काफ़िरों व अत्याचारियों की उपस्थिति से होगा लेकिन तब व सम्मान, ईमान वालों के क़दम चूमेंगे और अपमान व बेइज़्ज़ती काफ़िरों व अत्याचारियों को झेलनी पड़ेगी।

     

 

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