Dec १५, २०२० १२:५४ Asia/Kolkata
  • आयत क्या कहती हैं? उस दिन ईश्वर की निशानियां पूर्ण रूप से प्रकट हो जाएंगी।

जो लोग, ईमान या कुफ़्र में सबसे आगे हैं, चाहे वे ईश्वर के प्रिय बंदे हों या ईश्वर के दुश्मन हों, जीवित किए जाएंगे और संसार में लौटाए जाएंगे ताकि सत्य और असत्य के बीच फ़ैसला किया जाए।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 84 व 85 का अनुवाद:

यहाँ तक कि जब वे (हिसाब के कटघरे में) आ जाएँगे तो ईश्वर कहेगा, क्या तुमने मेरी आयतों को झुठलाया, जबकि तुम्हें उनके बारे में संपूर्ण ज्ञान नहीं था या फिर तुम (जीवन भर) क्या कर रहते थे? और उन्होंने जो अत्याचार किया है उसके कारण उनके विरुद्ध (दंड की) बात निर्धारित कर दी गई तो वे कुछ बोल नहीं सकेंगे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

स्वाभाविक है कि जब वे इस संसार में पुनः वापस आने के बाद जो निशानियां और चमत्कार देखेंगे उसके बाद उनके पास सत्य को नकारने का कोई मार्ग नहीं होगा और वे न तो किसी प्रकार का बहाना बना पाएंगे और न ही कोई बात कह सकेंगे। परिणाम स्वरूप उन्होंने ईश्वर के पैग़म्बरों और उसकी निशानियों पर जो अत्याचार किए हैं उनके कारण उन्हें दंडित किया जाएगा।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. इस संसार के अंतिम समय में प्रलय की एक झलक दिखाई जाएगी और अच्छे व बुरे लोगों के कुछ गुटों को ईश्वरीय न्यायालय में उपस्थित किया जाएगा और ईश्वर का एक प्रिय बंदा उन पर मुक़द्दमा चलाएगा।
  2. आवश्यक ज्ञान न हो तो किसी चीज़ का इन्कार नहीं करना चाहिए क्योंकि निश्चित रूप से इस पर हमें दंडित किया जाएगा।
  3. इसी आधार पर हमारी आस्थाएं भी ज्ञान और ठोस तर्कों के आधार पर होनी चाहिए।

  4. प्रलय में अत्याचारियों को निश्चित रूप से दंडित किया जाएगा और वहां उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं होगा।​​​​​​​

     

     

टैग्स