Jan १५, २०२१ ०९:४५ Asia/Kolkata
  • ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था की ओर से क़ुम स्थित फ़ोर्दो परमाणु प्रतिष्ठान के भीतरी हिस्से की जारी तस्वीर (एएफ़पी के सौजन्य से)
    ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था की ओर से क़ुम स्थित फ़ोर्दो परमाणु प्रतिष्ठान के भीतरी हिस्से की जारी तस्वीर (एएफ़पी के सौजन्य से)

परमाणु समझौते जेसीपीओए में शामिल ब्रिटेन ने ऐसी हालत में ईरान की ओर से इस समझौते का उल्लंघन होने का दावा किया है कि ख़ुद उसने इस समझौते पर अमल नहीं किया है।

ब्रिटेन ने गुरुवार को यह दावा करते हुए कि उसे अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की ऐसी गुप्त रिपोर्ट मिली है जिससे तेहरान के अनुसंधान रिएक्टर के ईंधन के लिए, धातु पर आधारित युरेनियम के ईंधन के उत्पादन पर शोध शुरु होने का पता चलता है, कहा कि ईरान का यह क़दम  जेसीपीओए का उल्लंघन है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की ओर से ईरान के परमाणु समझौते के पाबंद होने की पुष्टि के बावजूद, अमरीका 8 मई 2018 को इस समझौते से निकल गया और उसने ईरान के ख़िलाफ़ न सिर्फ़ विगत की पाबंदियाँ बल्कि नई पाबंदियाँ भी लगा दीं।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने एक साल तक जेसीपीओए के तहत अपने वचन पर अमल किया लेकिन जब देखा कि इस समझौते के योरोपीय सदस्य देश अपना वचन पूरा नहीं कर रहे हैं तो ईरान ने मई 2019 से पाँच चरण में इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करने का फ़ैसला किया।

योरोपीय देशों की ओर से जेसीपीओए के उल्लंघन के जारी रहने पर ईरानी संसद ने 1 दिसंबर 2020 को 9 अनुच्छेदों पर आधारित एक क़ानून पास किया जिसका शीर्षक “ईरानी राष्ट्र के हितों की रक्षा और पाबंदियों को ख़त्म कराने का स्ट्रैटिजिक क़दम” है।

इस क़ानून के तहत सरकार को 20 फ़ीसद युरेनियम का इन्रिचमेंट करने, कम स्तर के यूरेनियम का भंडार बढ़ाने और नई नस्ल के सेन्ट्रीफ़्यूज का इस्तेमाल करने पर बाध्य किया गया है।(MAQ/N)

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