Jan १६, २०२१ ०९:०० Asia/Kolkata
  • पोम्पेयो ने अलक़ायदा को ईरान के समर्थन का महाझूठ क्यों बोला? क्या पोम्पेयो पर ईरान पर हमले का जुनून सवार है? बिन लादेन से लंबी मुलाक़ात करने वाले गवाह से सुनिए इस दावे की हक़ीक़त

फ़ेक न्यूज़ जिसका अमरीका के परास्त राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने बहुत ढिंढोरा पीटा अगर किसी पर फ़िट बैठती है तो वह उनके विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो हैं।

पोम्पेयो भी अपने आक़ा ट्रम्प की तरह इस्राईल पर बहुत फ़िदा हैं और ईरान तथा सीरिया के ख़िलाफ़ युद्ध करवा देने के लिए बहुत बेचैन रहते हैं। पोम्पेयो ने नया शिगोफ़ा छोड़ा है कि ईरान अलक़ायदा के लड़ाकों के लिए अब नया अफ़ग़ानिस्तान बन गया है। उन्होंने दावा ठोंक दिया कि एबोटाबाद में बिन लादन के घर की तलाशी के दौरान जो दस्तावेज़ मिले उनसे साबित होता है कि अलक़ायदा और ईरान के बीच दशकों से संपर्क रहा है।

न तो इस बयान का कोई भरोसा है और न यह बयान देने वाले व्यक्ति यानी पोम्पेयो की कहीं कोई विश्वस्नीयता है। यह तो माहिर झूठे हैं। 2011 में बिन लादेन की हत्या हुई उसके बाद यह पहली बार ख़ुलासा किया जा रहा है कि ईरान और अलक़ायदा के बीच संबंध रहे हैं।

रायुल यौम अख़बार के चीफ़ एडिटर उन पत्रकारों में हैं जिन्होंने अलक़ायदा के सरग़ना ओसामा बिन लादेन से तोरा बोरा की पहाड़ियों में मुलाक़ात की और उनके साथ तीन दिन गुज़ारे। उनका कहना है कि पोम्पेयो का दावा निरी बकवास है। ईरान और अलक़ायदा के बीच वैचारिक मतभेद नहीं टकराव है। अलक़ायदा वहाबी विचारधारा रखता है और ईरान शीया देश माना जाता है। अब तक एक भी साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि कोई एक भी ईरानी अलक़ायदा में शामिल हुआ हो। बल्कि यह हक़ीक़त सारी दुनिया जानती है कि अलक़ायदा ने कई बार अफ़ग़ानिस्तान के मज़ार शरीफ़ में शीयों का क़त्ले आम किया। इराक़ में अलक़ायदा का सरग़ना अबू मुसअब ज़रक़ावी भी इस देश में शीयों पर किए जाने वाले दर्जनों हमलों का ज़िम्मेदार था।

यह तो सही है कि जब अकतूबर 2001 में अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया तो अलक़ायदा के कई लड़ाके, बिन लादेन की पत्नियां, बेटे और बेटियां ईरान की ओर भागे थे मगर इन सबको हिरासत में रखा गया और इंसानी भावना के तहत उनकी ज़िंदगी बचाई गई। बिन लादेन की एक बेटी तो हिरासत या नज़रबंदी से भाग कर सऊदी दूतावास पहुंच गई थी जहां से उसे सऊदी अरब वापस भेजा गया।

हम तो यही कहेंगे कि पोम्पेयो जाते जाते अपने तरकश में झूठ के जो दो चार तीर बच गए हैं उन्हें भी चला देना चाहते हैं ताकि शायद उन्हें ईरान या उसके नेतृत्व वाले शक्तिशाली मोर्चे पर हमले का बहाना मिल जाए।

अब तक बिन लादेन, अलक़ायदा, ग्यारह सितम्बर के हमलों के बारे में बहुत सी डाक्यूमेंट्रीज़ बन चुकी हैं मगर कहीं किसी में भी यह नहीं कहा गया है कि अलक़ायदा और ईरान के बीच कोई संपर्क था।

हम यह बात ईरान की मोहब्बत में नहीं बल्कि झूठ से पर्दा उठाने के लिए लिख रहे हैं। एक मीडिया संस्थान की हैसियत से हमारी ज़िम्मेदारी सच्चाई को बयान करना और फ़ेक न्यूज़ से लड़ना है।

रायुल यौम

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए

टैग्स