Feb ०७, २०२१ १९:२६ Asia/Kolkata

वरिष्ठ नेता ने कहा है कि ईरान के विरुद्ध अधिक दबाव की नीति, पहले की ही अमरीकी विफल नीति का हिस्सा है

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि अमरीकियों और यूरोपियों को ईरान के बारे में शर्त लगाने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उन्होंने परमाणु समझौते के बारे में अपने वचनों को उल्लंघन किया है।  उन्होंने कहा कि शर्तें लगाने का अधिकार तो इस्लामी गणतंत्र ईरान को है जिसने सारे वचनों का पालन किया।

ईरान की वायुसेना के वरिष्ठ कमान्डरों ने आज रविवार किो इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई से मुलाक़ात की।  वायु सेना द्वारा इमाम ख़ुमैनी के आज्ञापालन के एलान के अवसर पर वरिष्ठ नेता ने कहा कि उन्होंने केवल एक छोटे से कालखण्ड के लिए कुछ प्रतिबंधों को हटाया था किंतु फिर उन्होंने न केवल प्रतिबंधों को वापस पलटा दिया बल्कि उनमें वृद्धि भी कर दी।  एसे में उनको शर्त लगाने का कोई अधिकार नहीं है।  डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति काल के आरंभ में कहा था कि परमाणु समझौते से निकल कर ईरान के विरुद्ध अधिक दबाव की नीति अपनाते हुए एक अच्छे समझौते के लिए ईरान को वार्ता की मेंज़ पर खीच लाएंगे।  वरिष्ठ नेता के अनुसार ईरान के विरुद्ध अधिक दबाव की नीति, पहले की ही अमरीकी विफल नीति का हिस्सा है जिसकी विफलता इस समय अधिक स्पष्ट हुई है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने ईरान को कमज़ोर बनाने के उद्देश्य से अभूतपूर्व प्रतिबंधों को अमरीका की समीकरण वाली ग़लती बताया।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि उन्हीं नंबर वन मूर्खों में से एक ने दो साल पहले कहा था कि जनवरी 2019 को हम तेहरान में नया साल मनाएंगे।  अब वही व्यक्ति, इतिहास के कूड़दान में चला गया और उसके मुखिया को भी धक्के देकर बड़ी बेइज़्ज़ती से वाइट हाउस से निकाल बाहर किया गया हालांकि ईश्वर की कृपा से इस्लामी गणतंत्र ईरान, पूरे गौरव के साथ खड़ा है।  उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अमरीका के घटकों विशेषकर ज़ायोनी शासन के भय और चिंता का कारण यह वास्तविकता है कि अमरीका, अपने पतन की ओर बढ़ रहा है।  अमरीका के कई राजनेता कह चुके हैं कि अमरीका की सामाजिक व्यवस्था भीतर से खोखली हो चुकी है।

यह वास्तविकता है कि अमरीका और उसके घटकों के आंकलन में ग़लती के कारण ही उन्होंने ग़लत फैसले किये।  ईरान के विरुद्ध नई शर्त थोपने की समीक्षा भी इसी परिप्रेक्ष्य में की जा सकती है।  ईरान की मांग पहले प्रतिबंधों की वापसी है जो अमरीका और यूरोप की ज़िम्मेदारी है।  इस संदर्भ में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना है कि ईरान, जेसीपीओए से संबन्धित वादों में उसी समय वापस आएगा जब अमरीका, व्यवहारिक रूप में सारे प्रतिबंधों को हटाए।  जब हम इसका सत्यापन करके कि हां वास्तव में प्रतिबंध ख़त्म हो गये हैं, तब ही हम परमाणु प्रतिबद्धताओं की ओर लौटेंगे।  यह ईरान की एसी नीति है जिसका कोई विरोधी नहीं है। 

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