Feb १७, २०२१ १९:१८ Asia/Kolkata

इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर ने साफ़ तौर पर कहा है कि ईरान परमाणु समझौते में बातों को नहीं बल्कि अमल पर ध्यान देगा।

आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने बुधवार को तबरीज़ की जनता के फ़रवरी 1978 के क्रान्तिकारी आंदोलन की सालगिरह के मौक़े पर अपने संबोधन में इस्लामी क्रान्ति में आज़रबाइजान ख़ास तौर पर तबरीज़ की जनता के हमेशा याद रखे जाने वाले योगदान की सराहना की।

उन्होंने अपने संबोधन में इस्लामी क्रान्ति की उपलब्धियों और उसके नतीजे में ईरान में होने वाली तरक़्क़ी से भविष्य के निर्माण में फ़ायदा उठाने पर बल दिया।

सुप्रीम लीडर ने साम्राज्यवादी ताक़तों की इस्लामी क्रान्ति से दुश्मनी की वजह यह बतायी की इस्लामी क्रान्ति और इल्सामी गणतंत्र व्यवस्था ने पूरब और पश्चिम की सुपर पावरों की बनाई गयी वर्चस्ववादी व्यवस्था को रद्द कर दिया और उसके ख़िलाफ़ डट गयी

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रान्ति से पहले अमरीका और पूर्व सोवियत संघ ने दुनिया में वर्चस्ववादी व्यवस्था क़ायम कर रखी थी, एक हिस्से पर पूर्व सोवियत संघ तो दूसरे पर अमरीका का वर्चस्व था। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा कि इस वर्चस्ववादी व्यवस्था में एक ओर वर्चस्व जमाने वाली ताक़तें थीं तो दूसरी ओर वे देश थे जिन्होंने वर्चस्व को क़ुबूल कर लिया था।

सुप्रीम लीडर ने कहा कि चूंकि इस्लामी क्रान्ति और इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था ने इस व्यवस्था और बंटवारे को रद्द कर दिया इसलिए साम्राज्यवादी ताक़तें उसकी दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि कभी मानवाधिकार का मुद्दा उठाया जाता है तो कभी ईरान की मीज़ाईल ताक़त और कभी क्षेत्र में उसके प्रभाव की बात की जाती है, ये सब बहाना है, अस्ल वजह यह है कि ईरान ने वर्चस्ववादी व्यवस्था को ख़ारिज कर दिया है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने अपने संबोधन के आख़िरी भाग में परमाणु समझौते के संबंध में कहा कि अब ईरान अमरीका और योरोप के वादों पर नहीं बल्कि उसके अमल को देखेगा।

ग़ौरतलब है कि इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर साफ़ तौर पर कह चुके हैं कि अमरीका परमाणु समझौते से निकला है, उसने इस समझौते का उल्लंघन किया है इसलिए पहले उसको इस समझौते में वापस आना है। उन्होंने साफ़ कहा है कि अमरीका परमामु समझौते में वापस आए, सारी पाबंदियाँ ख़त्म करे, ईरान उसकी कार्वयाहियों को परखेगा, उसके बाद परमाणु समझौते के तहत अपनी जिन प्रतिबद्धताओं पर अमल को रोका है, उसे फिर से शुरू कर देगा।

इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर ने साफ़ तौर पर कहा है कि परमाणु समझौते के संबंध में शर्त रखने का अधिकार सिर्फ़ ईरान को हासिल है अमरीका या किसी दूसरे पक्ष को नहीं।

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