Mar ०३, २०२१ ०९:१९ Asia/Kolkata
  • ईरान की वायुसेना में दसियों युद्धक विमान शामिल, वायुसेना पहले से अधिक हुई मज़बूत, ईरान ने साबित कर दिया कि मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है

रक्षामंत्री ने कहा कि ईरान की मज़बूती और स्ट्रैटेजिक सफलता दुश्मन के अधिकतम दबाव की नीति के विफल होने की सूचक है

ईरान के प्रतिरक्षामंत्री ब्रिगेडियर अमीर हातेमी की उपस्थिति में दसियों युद्धक विमानों, हेलीकाप्टरों और मालवाहक सैन्य विमानों को वायुसेना के हवाले किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दसियों आधुनिकतम इंजनों को भी वायुसेना के हवाले किया गया। इस कार्यक्रम में नौ युद्धक विमानों, दस हेलीकाप्टरों और ईरान के प्रतिरक्षा उद्योग में तैयार किये गये दसियों इंजनों को वायुसेना के हवाले किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रतिरक्षामंत्री ने कहा कि ईरान की मज़बूती और स्ट्रैटेजिक सफलता दुश्मन के अधिकतम दबाव की नीति के विफल होने की सूचक है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने प्रतिबंध लगाकर और उपकरणों की ख़रीदारी पर रोक लगा कर ईरान को पराजित करने की चेष्टा की किन्तु ईरान ने प्रतिरक्षा के क्षेत्र में विभिन्न नीतियों को अपना कर दुश्मन की चालों पर पानी फेर दिया।

प्रतिरक्षामंत्री ब्रिगेडियर अमीर हातेमी ने कहा कि नौ F27,F14 और F4 मिराज युद्धक विमान और इसी प्रकार माल वाहक विमानों 747, C130,707 को सेना के हवाले किया गया और इन विमानों की सैन्य क्षेत्र में बहुत उपयोगिता है और इन्हें सेना के हवाले करने से वायुसेना पहले से अधिक मज़बूत होगी।

इसी प्रकार उन्होंने कहा कि जो 10 सैन्य हेलीकाप्टरों को वासुसेना के हवाले किया गया है और रणक्षेत्र में उनकी बहुत उपयोगिता है। प्रतिरक्षा मंत्री कहा कि इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद दुश्मन ने ईरान पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया जिसे देखकर ईरान की सशस्त्र सेना ने आत्म निर्भरता के विभिन्न क्षेत्रों में क़दम रखा और समय की आवश्यकता के अनुसार उसने इनों क्षेत्रों में ध्यानयोग्य सफलता अर्जित कर ली।

जानकार हल्कों का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की ध्यानयोग्य सफलता दुश्मनों की ओर से डाले जा रहे दबावों और प्रतिबंधों का प्रतिफ़ल है और अगर ये दबाव व प्रतिबंध न होते तो ईरान इतनी प्रगति न करता और दुश्मनों को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि अगर ईरान इसी तरह से आगे बढ़ता रहा तो उनकी चौधराहट खत्म हो जायेगी। दूसरे शब्दों में वर्चस्वादी देश ईरान की प्रगति से इसलिए चिंतित हैं क्योंकि यह प्रगति उनकी दादागीरी और चौधराहट के अंत का कारण बनेगी इसलिए वे ईरान को प्रगति से रोकने के लिए नित- नये शैतानी षडयंत्र रचते- रहते हैं लेकिन उनको शायद यह बात ज्ञात नहीं है कि मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है। MM

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