Mar २१, २०२१ ११:०५ Asia/Kolkata
  • ईरान की तरक़्क़ी और मज़बूती का राज़ क्या है, ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने किन बिन्दुओं पर बल दिया?

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने पिछले साल को कोरोना महामारी और अमेरिका के अधिकतम दबाव से मुकाबले के लिए ईरानी राष्ट्र की क्षमताओं के उजागर होने का साल कहा।

शनिवार को नये ईरानी साल का आरंभ हो गया। नौरोज़ के बधाई संदेश में ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं को बयान किया। उन्होंने पिछले साल को कोरोना महामारी और अमेरिका के अधिकतम दबाव से मुकाबले के लिए ईरानी राष्ट्र की क्षमताओं के उजागर होने का साल बताते हुए अपने संदेश में कहा कि ईरान के दुश्मन, जिनमें सर्वोपरि अमेरिका है, इस चेष्टा में थे कि ईरानी राष्ट्र घुटने टेक दे। अलबत्ता हम जानते थे कि ईरानी राष्ट्र डट जायेगा और वे सब परास्त हो जायेंगे और आज स्वयं अमेरिका और उसके यूरोपीय दोस्त मान रहे हैं कि अधिकतम दबाव की नीति विफल हो चुकी है।

ईदे नौरोज़ के अवसर इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने जो संदेश दिया और उसमें जिन बिन्दुओं पर बल दिया उनमें से एक यह है कि उत्पादन का समर्थन जारी रहना चाहिये, कठिनाइयों के मुक़ाबले में नतमस्तक नहीं होना चाहिये और साथ ही रुकावटों व बाधाओं का निवारण किया जाना चाहिये। इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने अपने संदेश में जिन बिन्दुओं पर बल दिया उनमें से कुछ इस प्रकार हैं।

दबावों व कठिनाइयों के मुकाबले में डट जाना और देश के भविष्य के निर्माण के लिए आगे बढ़ते रहना।

विकास कार्यों का निरंतर व अनवरत जारी रहना। इसी प्रकार उत्पादन के मार्ग की रुकावटों को दूर करने के लिए प्रयासों का हमेशा जारी रहना।

ईरानी राष्ट्र ने इस्लामी क्रांति की सफलता के आरंभ से वर्चस्ववादी व्यवस्था का मुक़ाबला किया है और इसके बाद भी वह निश्चितरूप से ज़ोर-ज़बरदस्ती करने वालों के सामने नहीं झुकेगा और इस्लामी क्रांति के मार्ग और वर्चस्ववादियों से मुकाबले के मार्ग को जारी रखेगा।

मुश्किलों और कठिनाइयों का समाधान, एक राष्ट्र के मज़बूत होने का कारण बनता है जिस तरह महान ईरानी राष्ट्र ने अब तक किया है।

दूसरे शब्दों में ईरान की प्रगति और मज़बूती का एक राज़ प्रतिरोध और प्रयास है। अगर ईरान, दुश्मनों की वर्चस्ववादी मांगों के मुकाबले में प्रतिरोध व प्रयास न करता तो आज जहां वह है वहां न होता। जो देश अमेरिका और उसके घटकों की चाटुकारिता पर इतराते हैं वे कहां हैं? यह जगज़ाहिर है।

बहरहाल अब तक ईरानी राष्ट्र ने अनगिनत कठिनाइयों का डटकर और अदम्य साहस के साथ मुकाबला और उनका समाधान किया और उसके इस काम का नतीजा ईरान की मज़बूती है और दुनिया के बहुत से देश व लोग ईरान को आदर्श की दृष्टि से देखते हैं। MM

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