Apr १८, २०२१ २०:०९ Asia/Kolkata
  • ईरान के 60 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन के एलान के बाद मध्यपूर्व बिल्कुल अलग चरण में पहुंच चुका है, हिज़्बुल्लाह ने खाने पीने की चीज़ों और ईंधन का भंडारण क्यों शुरू कर दिया?

यह तो साफ़ है कि नतन्ज़ परमाणु केन्द्र में भारी पैमाने पर युरेनियम संवर्धन शुरु करने का एलान करने के बाद जिसे ध्वस्त कर देने के दावे इस्राईल कर रहा था, ईरान अब बिल्कुल नए चरण में पहुंच गया है।

अब अगर परमाणु वार्ता नाकाम हो जाती है और परमाणु समझौते को पुनरजीवित करने की संभावनाएं ख़त्म हो जाती हैं तो मध्यपूर्व के इलाक़े के सामने दो ही विकल्प बचेंगे। या तो बड़ी क्षेत्रीय लड़ाई छिड़ जाएगी या फिर ईरान विश्व न्युक्लियर क्लब का हिस्सा बन जाएगा।

अगर हम मध्यपूर्व के आगामी हालात का अनुमान लगाना चाहते हैं तो तीन बेहद महत्वपूर्ण घटनाओं पर हमें नज़र डालनी होगी।

1 इस्राईल के जनरल गाबी अश्कनाज़ी का बयान है जो उन्होंने यूनान, साइप्रस और इस्राईल के विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया जहां इमारात के विदेश मंत्रालय का प्रतिनिधि भी मौजूद था। अश्कनाज़ी ने कहा कि इस्राईल ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जो भी संभव होगा वह करेगा।

2  ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का वह संदेश है जो उन्होंने थल सेना प्रमुख जनरल अब्दुर्रहीम मूसवी को भेजा है। इसमें उन्होंने कहा कि सेना मैदान में डटी रहे और जिम्मेदारियों के तहत आप्रेशन करने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।

3 हिज़्बुल्लाह लेबनान ने अपात हालात की तैयारी शुरू कर दी है। उसने जंग जैसे हालात से निपटने के लिए खाने पीने की चीज़ों, दवाओं और ईंधन का बंदोबस्त शुरू कर दिया है।

यह तो साफ़ है कि समुद्री जहाज़ों की जंग नाकाम रही जिसकी शुरुआत इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने की थी और इसी क्रम में इस्राईल ने ईरान के नतन्ज़ परमाणु केन्द्र में धमाका करवाया जिसके बिल्कुल ही उल्टे परिणाम निकले हैं। क्योंकि इस घटना के बाद हमने देखा कि बाबुल मंदब और ओमान सागर में इस्राईली जहाज़ों पर हमलों तक ही मामला नहीं थमा बल्कि ईरान ने यूरेनियम को साठ प्रतिशत के स्तर तक संवर्धित करना शुरू कर दिया।

ईरान के इस क़दम से अमरीका और यूरोप हतप्रभ रह गए जबकि इस्राईल और अरब सरकारें भी हिल गईं। इसके बारे में दो विचार हैं।

एक विचार यह है कि ईरान ने 60 प्रतिशत संवर्धन की शुरूआत वियेना में जारी वार्ता में अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए की है। वह अमरीका और यूरोप पर दबाव डाल कर अपनी मांगें पूरी करवाना चाहता है। जिनमें 1650 प्रतिबंधों को ख़त्म करवाना शामिल है।

दूसरा नज़रिया कहता है कि इतने ऊंचे स्तर तक संवर्धन का यूरेनियम केवल टैकटिक नहीं हो सकती। बल्कि यह बहुत सोची समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत ईरान बहुत आसानी से 90 प्रतिशत के संवर्धन तक पहुंच जाएगा जहां वह चाहे तो एटम बम भी बना सकता है।

ईरान की ओर से 60 प्रतिशत के ग्रेड तक यूरेनियम संवर्धन का एलान ईरान के आत्म विश्वास को दिखाता है और यह साबित करता है कि ईरान बहुत मज़बूत स्थिति में है जहां वह हर प्रकार के नतीजों का सामना कर सकता है।

हिज़्बुल्लाह ने खाने पीने की चीज़ों और ईंधन तथा दवाओं का भंडारड़ शुरू कर दिया है तो इसकी एक वजह तो यह है कि लेबनानी सरकार के ध्वस्त हो जाने की आशंका पैदा हो गई है जबकि दूसरी बड़ी वजह यह है कि उसे जंग की संभावना भी नज़र आने लगी है। अगर कोई इस बात को नहीं मानता तो वह सैयद हसन नसरुल्लाह को नहीं पहचानता और न ही उसे अमरीका और इस्राईल में फैल रही निराशा की जानकारी है। चूंकि अमरीका और इस्राईल की सारी योजनाएं ईरान और उसके घटकों के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है इसलिए वह बुरी तरह तिलमिलाए हुए हैं।

लड़ाई के रूप अब बदल चुके हैं और बदले हुए रूप में अमरीका और इस्राईल की हालत ठीक नहीं है। आने वाले दिनों में बहुत सी चौंका देने वाली ख़बरें सुनने को मिल सकती हैं। सबसे बड़ी ख़बर यह हो सकती है कि ईरान ने 90 प्रतिशत के ग्रेड तक यूरेनियम का संवर्धन शुरू कर दिया है। वैसे भी अमरीका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन चार महीने पहले कह चुके हैं कि ईरान परमाणु बम से कुछ ही हफ़्ते दूर है। बाक़ी आप ख़ुद समझ लीजिए।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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