Jun २२, २०२१ १९:५९ Asia/Kolkata
  • मआरिब की जंग अपने अंतिम चरण में, अमरीका की छटपटाहट, यमनियों के इरादे बुलंद, आख़िरी कार्यवाही के लिए कसी कमर...

अमरीका ने यमन की हालिया वार्ता में यह खुलकर धमकी दी ताकि वह यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों द्वारा मआरिब पर नियंत्रण को रोक दें। फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट कुछ मीडिया सूत्रों ने बताया है कि यमन की हालिया वार्ता में अमरीका ने खुलकर सऊदी अरब का पक्ष लिया और उसने सऊदी अरब से भी ज़्यादा मआरिब प्रांत में युद्ध विराम का अह्वान किया।

अलअख़बार समाचार पत्र ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सऊदी अरब ने अभी तक अपने उस वचन पर अमल नहीं किया है जो उसने ओमान पक्ष को दिया था। रियाज़ ने मसक़त से वादा किया था कि वह निर्धारित यात्राओं के लिए सनआ हवाई अड्डे को खोलने की इजाज़त देगा और इसी तरह अल हुदैदा बंदरगाह से ग़ैर पेट्रोलियम वस्तुओं की आवाजाही दोबारा शुरू कराएगा।

रिपोर्टों में बताया गया था कि मसक़त वापस होने पर समझौते और उसके लिखने की प्रक्रिया शुरू होगी किन्तु रियाज़ ने अपने वचनों पर अमल नहीं किया और अपने सारे वचनों को पैरों तले रौंद दिया। बात यहीं पर ख़त्म नहीं हुई सऊदी अरब ने मआरिब में हमले रोकने के लिए कई शर्तें ही रखी हैं। अलअख़बार का कहना है कि सऊदी अरब ने जो शर्तें रखी हैं उनसे पता चलता है कि यह शर्तें वाशिंग्टन ने रियाज़ को डिक्टेट की हैं ताकि वह इस तरह से यमन की भौगोलिक भूमिका को रोक सके।

लेबनान का यह समाचार पत्र लिखता है कि वाशिंग्टन, अपने हितों की रक्षा के लिए निरंतर हाथ पैर मार रहा है, लाल सागर और बाबुल मंदब में इस्राईल के हित और मकरान तथा हिन्द महासागर में अमरीका के  हित जो चीन के साथ प्रतिस्पर्धा से जुड़े हुए हैं, किसी से छुपे नहीं हैं।

अलअख़बार लिखता है कि सऊदियों और यमनी पक्षों के बीच राजनैतिक हालात कठिन हो गये हैं जबकि अमरीका और चीन के बीच स्ट्रेट्स, समुद्री रास्तों और महत्वपूर्ण द्वीपों के बारे में जंग तेज़ हो गयी है और यह सारे पक्ष यमन की बेहतरीन भौगोलिक स्थिति की वजह से इस देश को मैदाने जंग बनाए हुए हैं।

अमरीका, यमन द्वारा उसकी रणनैतिक स्थिति के प्रयोग को रोकने तथा मआरिब प्रांत और उसके प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण को रोकने के लिए युद्ध विराम का ढिंढोरा पीट रहा है ताकि अपने इस लक्ष्य को व्यवहारिक बना सके।

अलअख़बार की रिपोर्ट अनुसार वाशिंग्टन का यह मानना है कि मआरिब शहर पर नियंत्रण हो जाने की वजह से यमन का भौगोलिक महत्व बढ़ जाएगा और उसके बाद यमनी सेना और स्वयं सेवी बल बाबुल मंदब से मिलने वाले पश्चिमी क्षेत्रों को आज़ाद कराने की कोशिश करेंगे और यह अमरीका और इस्राईल के लिए बहुत बड़ी हार होगी और यही वजह है कि वह डराने और धमकाने से लेकर हर तरह का हथकंडा अपना रहा है लेकिन उसको पता नहीं है कि यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों के हौसले बुलंद हैं और उन्होंने यमन को विदेशी शक्तियों के चंगुल से आज़ाद करने का इरादा कर लिया है। (AK)

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