Jun २२, २०२१ २०:२९ Asia/Kolkata
  • हमास के नेता यहया सिनवार ने कहा फिर शुरू कर देंगे जंग, बेनेत की धमकी गज़्ज़ा में उतारेंगे ज़मीनी फ़ौज, तो पहला मिसाइल कौन फ़ायर करेगा?

हम तो यह समझ रहे थे कि हालिया ग़ज़्ज़ा जंग पिछली जंगों से अलग होगी यानी इस बार का संघर्ष विराम कुछ समय तक चलेगा और कोई राजनैतिक समझौता हो सकेगा जिसके नतीजे में ग़ज़्ज़ा पट्टी का परिवेष्टन ख़त्म होगा और वहां पुनरनिर्माण का काम शुरू हो जाएगा। लेकिन इस समय मिलने वाले सारे इशारे यह बता रहे हैं कि जंग किसी भी समय फिर शुरू हो सकती है।

ग़ज़्ज़ा पट्टी में हमास के नेता यहया सिनवार ने अंतर्राष्ट्रीय दूत के साथ मुलाक़ात के बाद साफ़ साफ़ कहा कि हम फिर से जंग की ओर लौटने के लिए तैयार हैं क्योंकि इस मुलाक़ात में कोई नया प्रस्ताव रखा ही नहीं गया।

दूसरी ओर इस्राईल के प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेत यह साबित करने में लगे हैं कि वह बिनयामिन नेतनयाहू से ज़्यादा बड़े चरमपंथी हैं और यह साबित करने का सबसे अच्छा रास्ता जंग छेड़ देना और अपने चरमपंथी समर्थकों को मस्जिदुल अक़सा में मार्च निकालने के लिए उकसाना है। सोमवार को यही दृश्य देखने में आया।

बेनेत की सरकार कमज़ोर है उसके पास सांसदों का मज़बूत बहुमत नहीं है। उसे लगता है कि समर्थन बढ़ाने के लिए जंग ही एक रास्ता है।

ग़ज़्ज़ा में फ़ौज उतार देने की बेनेत की धमकी साफ़ ज़ाहिर करती है कि पिछली 11 दिवसीय जंग में इस्राईली सेना को पराजय का मुंह देखना पड़ा था।

ग़ज़्ज़ा से इस समय ज्वलनशील ग़ुब्बारे इस्राईली बस्तियों पर जाकर गिर रहे हैं जिससे बार बार आग लग जा रही है। इस स्थिति से इस्राईली सरकार बुरी तरह परेशान है। इस समय इस्राईल का एक सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल मिस्र की यात्रा पर है जो इसी विषय पर मिस्री अधिकारियों से बात कर रहा है।

यहया सिनवार अंतर्राष्ट्रीय दूत से अपनी मुलाक़ात का जब ज़िक्र कर रहे थे तो उनकी आंख से आग निकल रही थी। वह अगर मिसाइल हमले की पहल कर देते हैं तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। पिछली जंग में भी मिसाइल हमले की शुरुआत हमास ने ही की थी।

यहया सिनवार और उनके सहयोगी मुहम्मद ज़ैफ़ जो हमास के सबसे प्रमुख कमांडर हैं अब इस धोखे में आने वाले नहीं हैं कि ग़ज़्ज़ा के पुनरनिर्माण का वादा करके संघर्ष विराम किया जाए और फिर इस वादे को आसानी से तोड़ दिया जाए।

फ़िलिस्तीनी संगठनों के मिसाइल पूरी तरह तैयार हैं और उनकी निगाहें अपने निशानों पर टिकी हुई हैं। यह मिसाइल बस ग्रीन सिग्नल के इंतेज़ार मैं हैं और इशारा मिलते ही तेल अबीब और रामून के हवाई अड्डों पर आग बरसाने लगेंगे।

इस बार जंग हुई तो बेनेत की सरकार जाएगी और नेतनयाहू भी सत्ता में लौट नहीं पाएंगे। इस्राईल में एसा तूफ़ान उठेगा जो क़ाबू में नहीं आएगा।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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