Jun २४, २०२१ २०:१४ Asia/Kolkata
  • इराक़ के परमाणु प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने से संबंधित साक्ष्य अब सामने क्यों ला रहा है इस्राईल? क्या यह ईरान को धमकी देने की कोशिश है?

चार बड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं जिनका संबंध ईरान के परमाणु मामले में जारी वार्ता से है।

  1. इस्राईली सरकार ने कुछ साक्ष्य और तसवीरें जारी की हैं जो इराक़ के परमाणु प्रतिष्ठानों की हैं जिन्हें इस्राईल ने जून 1981 में ध्वस्त कर दिया था।
  2. ईरान के निर्वाचित राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने खुलकर एलान कर दिया है कि अमरीका परमाणु समझौते में वापस आए या न आए वह बाइडन से तो मुलाक़ात नहीं करेंगे।
  3. रोयटर्ज़ ने ईरान के एक अधिकारी का बयान प्रकाशित किया है जिसमें अधिकारी ने कहा है कि गुरुवार को ईरान की सरकार यह फ़ैसला करेगी कि परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की अनुमति देने वाले आईएईए के साथ हुए समझौते की समय सीमा बढ़ाए या न बढ़ाए।
  4. अमरीकी सरकार ने ईरान से जुड़ी संस्थाओं की 36 वेबसाइटें बंद की हैं जिनमें अलआलम, अलमसीरा, अल्लोलो जैसे टीवी चैनलों की वेबसाइटें शामिल हैं।

इस्राईली सरकार ने चालीस साल पहले इराक़ के परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी करके उन्हें तबाह कर दिया था अब उसने इस हमले से जुड़े साक्ष्य सार्वजनिक किए हैं। हमारे ख़याल से यह संयोग नहीं बल्कि ईरान के ख़िलाफ़ मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है। बल्कि शायद यह ईरान को चेतावनी देने की कोशिश की जा रही है क्योंकि इस्राईल के नए प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेत ने बयान भी दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने का मौक़ा हरगिज़ नहीं दिया जाएगा।

बाइडन प्रशासन ने ईरान से संबंधित 36 वेबसाइटों को बंद करने का जो क़दम उठाया है उसकी वजह यह हो सकती है कि बाइडन को यह एहसास हो गया है कि ईरान को परमाणु समझौता बहाल करने की कोई जल्दबाज़ी नहीं है। यह शायद बाइडन सरकार की ओर से उत्तेजक कार्यवाही है जिसके बाद इसी तरह की कई और कार्यवाहियों की संभावना है।

शायद इसी वजह से सैयद इब्राहीम रईसी ने यह बयान भी दिया है कि उन्हें बाइडन से मुलाक़ात में कोई दिलचस्पी नहीं है। परमाणु समझौते के अंतर्गत आईएईए से ईरान का जो एग्रीमेंट हुआ था उसकी समयसीमा में विस्तार की संभावना मौजूद है क्योंकि इससे ईरान को कुछ और समय मिल जाएगा तब तक नए राष्ट्रपति पूरी तरह देश का संचालन अपने हाथ में ले लेंगे।

ईरान के मामले में इस्राईल की नई सरकार बिनयामिन नेतनयाहू से अधिक कठोर नीति अपना रही है। वह परमाणु समझौते के रास्ते में अड़चनें डालने की हर संभव कोशिश कर रही है और इसीलिए वह ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले भी करना चाहती है।

इस्राईली प्रशासन को इस समय सबसे बड़ी चिंता यह है कि ईरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए ज़रूरी सारे अनुभव और तकनीक मौजूद है यानी अगर ईरान इरादा कर ले तो वह परमाणु हथियार बनाने में कामयाब हो जाएगा। ईरान के परमाणु समझौते में अगर अमरीका वापस आ जाता है तो ईरान की यूरोप और अमरीका के बैंकों में फंसी 110 अरब डालर की संपत्ति तेहरान को मिल जाएगी और ईरान का तेल निर्यात भी शुरू हो जाएगा। इसका नतीजा यह होगा कि ईरान की अर्थ व्यवस्था तेज़ गति से आगे बढ़ेगी।

जब ईरान चालीस साल से प्रतिबंधों का सामना करते हुए भी पूरे मध्यपूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाने और अपने घटकों को मज़बूत बनाने में कामयाब हो गया और ईरान आज इस्राईल के अस्तित्व के लिए एक बड़ा ख़तरा है। अब अगर ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए तब क्या हालात होंगे इसका अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं है।

ईरान की इस्लामी क्रांति पूरी ताक़त से आगे बढ़ रही है किसी को यह बात पसंद आए या न आए।

आज का ईरान 1981 का इराक़ नहीं है कि उसके परमाणु प्रतिष्ठान पर इस्राईल हमला कर दे। ईरान के पास बहुत अधिक ताक़त और बड़े शक्तिशाली घटक मौजूद हैं।

हम तो हमेशा ही अमरीका और इस्राईल का विरोध करते आए हैं। हमने अमरीका के घटकों को कितनी बार सावधान किया कि अमरीका पर भरोसा न करें क्योंकि पीठ में खंजर घोंपने का अमरीका का इतिहास बहुत लंबा है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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