Aug ०४, २०२१ १९:४५ Asia/Kolkata
  • इस्राईल समर्थक वेबसाइट का तंज़ः क़ुरआन में इस्राईल का ज़िक्र 44 जगह फ़िलिस्तीन का एक बार भी नहीं, मिस्री अध्ययनकर्ताओं का मुंहतोड़ जवाब!

इस्राईल अरबी बोलता है नाम की एक वेबइसाट ने अपनी एक हेडलाइन से विवाद खड़ा कर दिया। मिस्र में सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर ज़ोरदार बहस छिड़ गई।

मिस्र में कुछ लोगों ने यह कहा कि इस्राईल समर्थक वेबसाइट ने जो कुछ लिखा है उसका जवाब देना उचित नहीं है लेकिन कुछ यूज़र्स का कहना था कि जवाब देना ज़रूरी है।

वेबसाइट की इस टिप्पणी का जवाब वैसे तो कई लोगों ने दिया लेकिन मिस्री कार्यकर्ता अब्दुल्लाह रुश्दी का जवाब काफ़ी चर्चा में आया। उन्होंने लिखा कि क़ुरआन में इस्राईल का ज़िक्र तो ज़रूर आया है लेकिन वहां इस्राईल का मतलब एक इंसान है जो दरअस्ल हमारे एक पैग़म्बर हज़रत याक़ूब हैं, क़ुरआन में इस्राईल का मतलब यह ग़ैर क़ानूनी सरकार नहीं है जिसने फ़िलिस्तीन पर क़ब्ज़ा कर रखा है।

रुश्दी ने आगे लिखा कि यह भी पता होना चाहिए कि क़ुरआन में सूअर का ज़िक्र है मगर शेर का ज़िक्र नहीं है मगर इस बात से इस सच्चाई का खंडन नहीं होता कि सूअर घटिया जानवर और शेर बहादुर जानवर है। सूअर को चाहिए कि ख़ूब खा पीकर मोटा तगड़ा हो जाए क्योंकि एक दिन शेर उस पर हमला करेंगे और उसे चीर फाड़ डालेंगे।

डाक्टर फ़ौज़िया अश्मावी नाम की यूज़र ने लिखा कि अध्ययन से पता चलता है कि क़ुरआन में इस्राईल शब्द 43 जगह आया है। 41 आयतों में इस्राईल शब्द अकेला नहीं है बल्कि बनी इस्राईल आया है और शेष जगहों पर इस्राईल शब्द अकेला आया है। दोनों ही हालतों में इस्राईल से तात्पर्य ग़ैर क़ानूनी अतिग्रहणकारी शासन नहीं है जिसने 1948 में फ़िलिस्तीन पर क़ब्ज़ा कर लिया। इस्राईल से तात्पर्य अल्लाह के पैग़म्बर हज़रत याक़ूब बिन इसहाक़ हैं।

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