Aug २०, २०२१ १८:३८ Asia/Kolkata

कल रात शामे गरिबां थी, कर्बला जनाबे ज़ैनब के अकेलेपन में डूबी हुई थी ... जलती हुई मोमबत्तियां जनाबे ज़ैनब के दिल के हाल को बयान कर रहीं हैं जो अपने भाई की जुदाई में ढलती जा रहीं थीं ... एक अज़ादार का कहना है कि यह मूसीबत और त्रास्दी इतनी बड़ी थी कि जनाबे ज़ैनब को उम्मुल मसायब कहा जाने लगा, कल की ही रात थी कि जब हज़रत ज़ैनब को क़ैदी बनाया गया था, उन्होंने आशूरा आंदोलन के दूसरे भाग की शुरुआत कूफ़ा स्थित उबैदुल्लाह इब्ने ज़्याद के महल से अकेले ही आरंभ किया। आज जब खंडर में बदल चुके ...

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