Aug २६, २०२१ १८:५३ Asia/Kolkata
  • बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमत नहीं हो सके अमरीका और इस्राईल, ईरान के चलते दोनों का तालमेल हुआ ध्वस्त

इस्राईल के प्रधानमंत्री के रूप में नेफताली बेनेत ने अपनी पहली अमरीकी यात्रा में वहां के विदेश और रक्षा मंत्रियों से भेंटवार्ता की। गुरूवार को वे अमरीकी राष्ट्रपति से मुलाक़ात करेंगे।

इस्राईल के प्रधानमंत्री एसी स्थिति में अमरीका की यात्रा कर रहे हैं कि जब दोनो पक्ष द्विपक्षीय संबन्धों के बारे में बहुत अधिक प्रचार करते रहते हैं।

अमरीकी विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन ने नेफताली के साथ भेंट में कहा कि इस्राईल की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना, अमरीका की अटल नीति है।  इस मुलाक़ात में नेफताली बेनेट ने कहा कि इस्राईल से अधिक भरोसेमंद अमरीका का कोई भी घटक नहीं है।

यह बातें ग़लत तो नहीं हैं लेकिन यह भी सच है कि तेलअवीव और वाशिग्टन के बीच कुछ गंभीर मतभेद भी पाए जाते हैं।  बाइडेन के सत्ता संभालने के बाद से यह मतभेद अधिक स्पष्ट हुए हैं।  अमरीका के पूर्व राष्ट्रपतियों के विपरीत बाइडेन ने सत्ता संभालने के काफ़ी बाद इस्राईल के तत्कालीन प्रधानमंत्री नेतनयाहू से बात की थी।

ब्लिंकन और नेफताली की भेंट में भी कुछ मतभेद सामने आए।  इन मतभेदों में से एक, फ़िलिस्तीन का टू स्टेट साल्यूशन है।  नेफताली ने अमरीका यात्रा से पहले कहा था कि जबतक वे प्रधानमंत्री हैं तबतक वे स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी सरकार बनने की अनुमति कभी भी नहीं देंगे।  हालांकि नेफताली के साथ भेंट में अमरीकी विदेशमंत्री ने फ़िलिस्तीनियों के साथ संबन्धों की याद दिलाते हुए कहा है कि बाइडेन प्रशासन के निकट टू स्टेट साॅल्यूशन ही आदर्श है।

अमरीका और इस्राईल के बीच मतभेदों का एक अन्य मुद्दा, ईरान का परमाणु कार्यक्रम है।  इस्राईली अधिकारी बारंबार यह कह चुके हैं कि अमरीका के परमाणु समझौते में वापस आने के वे विरोधी हैं। नेफताली बेंत ने अपनी पहली अमरीकी यात्रा से पहले कहा था कि संयुक्त राज्य अमरीका की अपनी यात्रा के दौरान ईरान से मुक़ाबले के बारे में राष्ट्रपति बाइडेन के सामने वे एक नई योजना पेश करेंगे।

संचार माध्यमों की अटकलों के अनुसार यह योजना इस बात पर आधारित है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम में हालिया दिनों में जो प्रगति हुई है वह ईरानी परमाणु कार्यक्रम के बारे में विश्व समुदाय की चिंता को दूर नहीं कर पाएगी।  एसे में ईरान पर दबाव बनाया जाना ज़रूरी है।  हालांकि अमरीकी सरकार अभी तक परमाणु समझौते में वापस नहीं आई है लेकिन उसको परमाणु समझौते में वापस लाने के लिए 6 चरणों की वार्ता हो चुकी है।  अमरीकी अधिकारी इस बारे में सातवें चरण की वार्ता के संनब्ध में अपनी रज़ामंदी का एलान पहले ही कर चुके हैं।

दूसरा बिंदु यह है कि अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में अमरीकी शक्ति के बारे में अब गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं।  यहां तक कि हाल ही में कुछ इस्राईली सैनिकों ने अमरीका पर निरभर्ता को कम करने की मांग की है।  इन इस्राईली सेैनिकों का यह मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान का नियंत्रण यह दर्शाता है कि पश्चिमी एशिया के बारे में अमरीका की नीतियां पूरी तरह से विफल रही हैं।

एक इस्राईली वेबसाइट "आरूत्स शूअ" के अनुसार इस्राईल के कई कमांडरों और जनरलों ने वहां के प्रधानमंत्री को एक खुला ख़त भेजकर चेतावनी दी है कि अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम और उसपर तालेबान के क़ब्ज़े के दृष्टिगत इस्राईल को अब अमरीका पर निरभर्ता के बारे में ठीक से सोचना होगा।  पत्र लिखने वाले सैन्य अधिकारियों ने लिखा है कि अमरीका के पास अब 30 साल पहले वाली हैबत नहीं रह गई है।

उनके अनुसार अब क्षेत्र की शक्तियों के रूप में ईरान और रूस को देखा जा रहा है।  वैसे तो यह कहा जा सकता है कि अमरीका अब भी इस्राईल के समर्थन के प्रति कटिबद्ध है और अमरीका की सरकार में ज़ायोनी लाॅबी का भी बहुत अधिक प्रभाव है लेकिन एसा लगता है कि तेलअवीव और वाशिंगटन के संबन्धों में पाया जाने वाला मतभेद, उनके सहयोग पर भारी पड़ रहा है।  

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