Sep २२, २०२१ २१:५५ Asia/Kolkata
  • अमरीका निकाल ले गया अपने पैट्रियट मिसाइल, बेहद कठिन विकल्पों में घिरी है रियाज़ सरकार, क्या ईरान और तुर्की से दोस्ती का फ़ैसला करने वाले हैं बिन सलमान?

अमरीका ने सऊदी अरब से अपने पैट्रियट मिसाइल सिस्टम निकल लिए हैं जिसके बाद टीकाकार कहने लगे हैं कि रियाज़ सरकार के सामने अब बड़े कठिन विकल्प हैं। कुछ ही दिन पहले एसोसिएटेड प्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि बाइडन सरकार ने हालिया हफ़्तों के दौरान सऊदी अरब की प्रिंस सुल्तान हवाई छावनी से पैट्रियट मिसाइल निकाल लिए हैं।

राजधानी रियाज़ के बाहर स्थित इस छावनी में कभी कई हज़ार अमरीकी सैनिक तैनात थे। यह तब हुआ था जब वर्ष 2019 में आरामको कंपनी के प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो गए थे।

गत जून महीने में वाल स्ट्रीट जरनल ने अपनी रिपोर्ट में ख़ुलासा किया था कि बाइडन सरकार ने पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की आठ बैट्रीज़ इराक़, कुवैत, जार्डन और सऊदी अरब से निकालने का फ़ैसला कर लिया है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि अमरीका ने अपने इस फ़ैसले से रियाज़ सरकार को बड़ी गंभीर समस्या में फंसा दिया है अब रियाज़ सरकार के पास यही विकल्प रह जाता है कि जितनी जल्दी संभव हो ईरान और तुर्की से अपना तनाव ख़त्म करे।

इस बीच यमन से सऊदी अरब के प्रतिष्ठानों पर हमले भी तेज़ हो गए हैं जिनके सामने सऊदी अरब बेबस दिखाई दे रहा है।

क़तर विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रोफ़ेसर अली बाकीर कहते हैं कि सऊदी अरब रूस से संबंध बढ़ाकर इस संकट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था लेकिन इससे उसकी समस्या हल होने वाली नहीं है। रियाज़ सरकार राजनैतिक और सामरिक दृष्टि से वाशिंग्टन पर निर्भर है इसलिए उसके लिए विकल्प खोज पाना आसान नहीं है। इन हालात में सऊदी अरब के पास यही विकल्प रह जाता है कि ईरान और तुर्की से अपना तनाव फ़ौरन ख़त्म करे। अगर सऊदी अरब ने यह न किया तो उसकी पोज़ीशन बहुत कमज़ोर रहेगी।

मिस्री लेखक यासिर अब्दुल अज़ीज़ का मानना है कि जो बाइडन ने वाइट हाउस में पहुंचने के बाद विदेश नीति की बहुत सी परम्पराओं को उलट दिया। सत्ता में पहुंचने से पहले बाइडन ने साफ़ साफ़ एलान कर दिया कि वह सऊदी अरब को सज़ा देंगे। अब अमरीका सऊदी अरब को सज़ा दे या न दे अगर वह पश्चिमी एशिया में अपनी उपस्थिति सीमित करता है तो यही अपने आप में सऊदी अरब के लिए बड़ी सज़ा होगी।

सऊदी अरब इन हालात में इस्राईल को अपनी बैसाखी बनाना चाहता है मगर समस्या यह है कि सऊदी अरब की जनता इस्राईल से नफ़रत करती है। यही वजह है कि रियाज़ सरकार ने बग़दाद का सहारा लेकर ईरान से शांति वार्ता शुरू कर दी। मगर यह भी है कि सऊदी अरब अमरीका की नौका से पूरी तरह उतरना भी नहीं चाहता। इसलिए अभी यह देखना शेष है कि सऊदी अरब क्या फ़ैसला करता है।

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