Sep २६, २०२१ ०४:३२ Asia/Kolkata
  • फ़ज़ीलत वह है जिसकी गवाही दुश्मन भी दे, हमास ने अपने व्यवहार से इस्राईली सैनिक का जीता दिल, आज़ाद होने के वर्षों बाद उसने कहा...  

अतिवादी ज़ायोनियों की ओर से भारी दबाव डाले जाने के बावजूद भी ज़ायोनी सैनिक हमास की बुराई करने के लिए तैयार नहीं हुआ।

हमास ने एक पूर्व ज़ायोनी सैनिक गिलआद शालीत को 1000 से अधिक फिलिस्तीनी बंदियों के बदले में वर्ष 2011 में रिहा कर दिया था और लगभग 10 वर्षों का समय बीत जाने के बाद भी यह ज़ायोनी सैनिक अतिवादी ज़ायोनियों की ओर से भारी दबाव डाले जाने के बावजूद एक बार भी हमास की बुराई करने के लिए तैयार नहीं हुआ।

10 वर्षों तक हमास के बारे में मौन धारण करने के बाद गिलआद शालीत ने बताया कि वह हमास के पास कैसे था।

समाचार एजेन्सी फार्स की रिपोर्ट के अनुसार 25 जून 2006 को हमास की सैनिक शाखा क़स्साम ब्रिगेड ने इस ज़ायोनी सैनिक को बंधक बना लिया था और 2011 में 1027 फिलिस्तीनी बंदियों के बदले में उसे रिहा कर दिया गया था।

जायोनी सेना ने ग़ज़्ज़ा पट्टी का परिवेष्टन कर रखा था और वह आधुनिकतम हथियारों व तकनीक से लैस है फिर भी वह 5 वर्षों तक इस बात का पता न लगा सकी कि गिलआद शालीत को हमास ने कहां रखा है जब वह अपने सैनिक को नहीं ढ़ूंढ़ पायी तो मजबूर होकर एक हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी बंदियों को उसने आज़ाद कर दिया। दूसरे शब्दों में उसने मजदूर होकर हमास के साथ बंदियों के आदान- प्रदान के समझौते पर हस्ताक्षर किया और हमास इस बात के प्रति कटिबद्ध हुआ कि वह एक हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी बंदियों की आज़ादी के बदले में गिलआद शालीत को रिहा करेगा।

बहरहाल गिलआद शालीत को आज़ाद हुए 10 वर्ष का समय हो रहा है और जब से उसे आज़ाद किया गया है अधिकांश समय वह इस्राईल से बाहर रहता है और अब तक उसने अतिवादी ज़ायोनियों के भारी दबाव के बावजूद एक बार भी उन लोगों की बुराई नहीं की या उन पर किसी के प्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप लगाया जिन्होंने 5 वर्षों तक उसे बंदी बनाकर रखा था।

फिलिस्तीनी समाचार एजेन्सी शहाब ने 25 सितंबर को एक वीडियो प्रकाशित किया जिसमें बिल्कुल साफ- साफ देखा जा सकता कि गिलआद शालीत कुछ उन इस्राईलियों के बीच में है जिनके बारे में कहा जाता है कि ये लोग होलोकास्ट की घटना में बच जाने वाले हैं और 10 साल के बाद पहली बार वह बताता है कि हमास ने उसे कैसे बंदी बना कर रखा था।

जब उससे पूछा जाता है कि बंदी बनाये जाने के दौरान हमास ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया था तो वह कहता है कि उन पांच वर्षो के दौरान हमास का प्रयास था कि मैं पूरी सलामती के साथ रहूं। मैं उन वर्षों में बीमार नहीं था। मैं इस समय भी कमज़ोर व पतला हूं परंतु उस समय अधिक दुबला था। हमास वाले उस समय इस बात से चिंतित थे कि कहीं मेरा स्वास्थ्य ख़राब न हो जाये, मेरी शारीरिक स्थिति विषम व खराब न हो जाये क्योंकि मैं एक ज़िन्दा सैनिक था और मरे हुए सैनिक से मेरा महत्व बहुत अधिक था। इसलिए मैं उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था और इसीलिए वे मेरा बहुत ध्यान रखते थे।  

जब गिलआद शालीत से पूछा गया कि रात-दिन कैसे गुज़रते थे तो कहता है कि समस्त चीज़ें उल्टी थीं दिनों को मैं सोता था और रातों को जागता था।

गिलआद शालीत से जब एक व्यक्ति सवाल करता है कि जब आप हमास की कैद में थे तो एक वीडियो प्रकाशित हुई थी जिसमें आपको समाचार पत्र पढ़ते दिखाया गया था तो क्या हमास ने आपको इस कार्य के लिए बाध्य किया था? इस सवाल का जवाब शालीत मुस्कुरा कर देता और कहता है मैं समझता हूं कि वह वीडियो मेरी गिरफ्तारी के तीन वर्ष बाद का था। वीडियो में जो समाचारपत्र मुझे पढ़ते हुए दिखाया गया था उसका लक्ष्य उस तारीख को दिखाना था जो समाचार पत्र पर लिखी हुई थी।

गिलआद शालीत से जब पूछा गया कि जब वह हमास की क़ैद में थे तो उनके कैद व रखने की जगह को लगातार बदला जाता था या नहीं तो इसके जवाब में वह कहता है कि जो लोग मेरी देखभाल व निगरानी करते थे वे हमास के बहुत ही भरोसेमंद लोग थे और वे सारी चीज़ों को गोपनीय रखते थे और इसी कारण इस्राईल वर्षों तक मुझे बंधक बनाये रखने के बावजूद इस बात का पता नहीं लगा सका कि मुझे कहां रखा गया है। इन वर्षों में मैं अधिकांश समय में एक ही स्थान पर था और बहुत कम जगह बदली जाती थी।

जब उससे पूछा गया कि इन वर्षों में उसे खाने के लिए क्या दिया जाता था तो उसने कहा कि इस्राईल की बनी हुई चीज़ें मुझे खाने के लिए दी जाती थीं।

इसी प्रकार जायोनी सैनिक गिलआद शालीत जिन लोगों की निगरानी में था उनके व्यवहार के बारे में कहता है कि उनमें से कुछ हिब्रु भाषा जानते थे और उनमें कुछ बड़ी उम्र के लोग थे जो इस्राईल में काम कर चुके थे जबकि कुछ अंग्रेजी भी जानते थे मगर जो लोग न अंग्रेजी जानते थे और न हिब्रु तो उनसे संपर्क करने के लिए मैं उन कुछ सीमित अरबी शब्दों का सहारा लेता था जिन्हें मैं जानता था और कहने का अपना तात्पर्य समझा ले जाता था।

शालीत कहता है कि जैसाकि आप लोग देख रहे हैं कि मैं ठीक व स्वस्थ हूं। इस समय मैं काम करता हूं, मैंने विवाह कर लिया है और मैं एक साधारण ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूं।

यह वीडियो ऐसी स्थिति में प्रकाशित हुआ है जब अब भी कई इस्राईली हमास की क़ैद में हैं और वे भी अपनी आज़ादी की प्रतीक्षा में हैं।

जानकार हल्कों का मानना है कि हमास द्वारा इस वीडियो के प्रकाशित करने का उद्देश्य, यह बताना है कि दुश्मन के बंदी के साथ भी मानवता प्रेमी व्यवहार किया जा रहा है और साथ ही यह बताना है कि इस्राईल आधुनिकतम तकनीक से लैस होने के बावजूद यह भी पता नहीं लगा पा रहा है कि उसके सैनिक व ग़ैर सैनिक को हमास ने कहां रखा है और न ही वह उन्हें आज़ाद करा पा रहा है। MM

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