Sep २७, २०२१ १७:४१ Asia/Kolkata

….अरबईन की पूर्व संध्या पर इमाम हुसैन की तीन साल की बेटी का रौज़ा श्रद्धालुओं का जमघट बना हुआ है.....युवा श्रद्धालु का कहना है कि हम इमाम हुसैन के चाहने वाले हैं और अपनी गरिमा और गौरव की बुनियाद यही समझते हैं कि इमाम हुसैन के रास्ते पर चलते रहें....इस साल जो श्रद्धालु चेहलुम के अवसर पर कर्बला नहीं पहुंच सके हैं वह इमाम हुसैन की बेटी के रौज़े पर पहुंच कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं।

.....महिला श्रद्धालु का कहना है कि अरबईन के मौक़े की ज़ियारत इमाम हुसैन से वफ़ादारी और कर्बला की महानता की प्रतीक है......श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला के मरुस्थल में नज़र आने वाली मज़लूमियत को याद किया नौहे पढ़े गए मातम किया गया .....ईरान से पहुंचे श्रद्धालु का कहना है कि हम अपने शहीदों को भी याद कर रहे हैं, महान शहीद जनरल सुलैमानी को याद कर रहे हैं जिनका नाम हमेशा बुलंदियों पर रहेगा।....युवा श्रद्धालु का कहना है कि हम अपनी जान दे देंगे लेकिन इस परचम को झुकने नहीं देंगे, अरबईन के इस वैभव को कम नहीं होने देंगे। जब तक हमारी रगों में ख़ून है चेहलुम इसी तरह मनाया जाता रहेगा। इमाम हुसैन के मार्ग पर चलने वालों का जज़्बा और संकल्प कितना ख़ूबसूरत है जो इमाम हुसैन की मासूम बेटी के मज़ार पर नज़र आ रहा है। दमिश्क़ से आईआरआईबी के लिए एसाम हेलाली की रिपोर्ट   

 

 

 

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