Oct १०, २०२१ १४:४१ Asia/Kolkata

आख़िरकार फ़िलिस्तीनी किसानों के इंतेज़ार की घडियां ख़त्म हुईं और खजूर पक गयी।

अच्छी और उचित ज़मीन, विशेषकर ध्यान और ख़याल की वजह से ही इस क्षेत्र के किसानों को ख़जूर की अच्छी फ़सल हासिल होती है, फ़िलिस्तीनी किसान खजूर की इस आय से एक साल तक आराम से बैठकर खाते हैं।

एक फ़िलिस्तीनी किसान जमाल अबू जमीज़ा का कहना है कि ग़ज़्ज़ा पट्टी इसी फ़स्ल से पहचाना जाता है और यह ग़ज़्ज़ा तथा दैरे बल्ह में कृषि का एक महत्वपूर्ण उत्पादन है, इस समय हमको निर्यात की समस्या का सामना है, इससे पहले तक हम अपने उत्पादन जार्डन और दूसरे अरब देशों की ओर निर्यात करते थे लेकिन ग़ज़्ज़ा के अत्याचारपूर्ण परिवेष्टन की वजह से यह समस्या पैदा हुई, आज हमारे उत्पादन, आंतरिक ख़र्चे से ज़्यादा हो रहे हैं।

फ़िलिस्तीन के कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर प्रतिवर्ष 9 हज़ार टन ख़जूर ग़ज़्ज़ा पट्टी के 900 हेक्टर क्षेत्रफल में उगाया जाता है और इस संबंध में किसानों और खजूर पैदा करने वाले हर प्रकार की सुविधाएं और सेवाएं दी जाती हैं, यह खजूर मध्यपूर्व की बेहतरीन खजूरों में गिनी जाती है।

 ग़ज़्ज़ा पट्टी में कृषि मंत्रालय के अधिकारी अयाद अलबार का कहना है कि खजूरों की पैदावार, जलवायु जैसे हालात पर निर्भर होती है और लगभग 9 से 10 हज़ार तट खजूरें पैदा होती हैं, सबसे बड़ी समस्या और रुकावट ज़ायोनी शासन है जिसने आने जाने के रास्ते बंद कर दिए हैं और फ़िलिस्तीनी किसानों को आने जाने नहीं देता जिसकी वजह से किसानों के उत्पादन और पैदावार जमा हो जाती है।

 फ़िलिस्तीनी किसान आस भरी निगाहों से अपने उत्पादन को देखते रहते हैं ताकि एक साल ही अथक मेहनत के बाद फलों को तोड़ सकें, फ़िलिस्तीनी किसानो को बहुत ही कठिन हालात का सामना है लेकिन इसके साथ ही इस्राईल इन उत्पादनों के निर्यात में रुकावट भी पैदा किए हुए है जिसकी वजह से यह उत्पादन ग़ज़्ज़ा से बाहर नहीं जा पाते

 

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