Oct १२, २०२१ २०:२८ Asia/Kolkata
  • अरब टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः इस्राईली प्रधानमंत्री घमंड में अंधे हो गए हैं कि उन्हें ज़मीनी सच्चाई और पत्थर की लकीर नज़र नहीं आ रही है

इस्राईली प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेत को घमंड और द्वेष ने इस तरह अंधा कर दिया है कि वह मध्यपूर्व में तेज़ी से बदल रहे हालात को देख ही नहीं पा रहे हैं। ख़ास तौर पर सीरिया में मौजूद ज़मीनी हालात से वह पूरी तरह बेख़बर हैं।

हमारी इस बात का सुबूत बेनेत का वह बयान है जो उन्होंने मैकोर रीशोन नामक अख़बार की ओर से आयोजित किए गए कार्यक्रम में गोलान हाइट्स के बारे में दिया।

बेनेत ने इस कार्यक्रम में बड़े जोश में कहा कि सीरिया के बारे में विश्व समुदाय का दृष्टिकोण बदल जाता है तब भी गोलान हाइट्स इस्राईल के ही पास रहेंगी। उन्होंने अपने भाषण के आख़िर में कहा कि गोलान हाइट्स इस्राईल की हैं बस!

बेनेत और उनके सारे दक्षिणपंथी नस्लवादी घटकों की समझ में यह बात नहीं आ रही है कि 55 साल पहले जिन हालात की वजह से इस्राईल को गोलान हाइट्स पर क़ब्ज़ा करने का मौक़ा मिल गया था वह अब राजनैतिक, सामरिक, अरब और अंतर्राष्ट्रीय हर पहलू से पूरी तरह बदल चुके हैं। 1967 के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाने वाली इस्राईली वायु सेना अब कोई भी युद्ध नहीं जीत पा रही है। सीरिया की यह हालत है कि वह दस साल से ज़्यादा समय से अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय साज़िशों और चढ़ाई का सामना करते हुए अपने आप को बचाने में कामयाब रहा है।

आज इस्राईल सीरिया और हिज़्बुल्लाह के मिसाइलों के डर से थर थर कांप रहा है। ग़ज़्ज़ा पट्टी में मौजूद फ़िलिस्तीनी संगठनों ने पूरे इस्राईल को हालिया युद्ध में बेबस करके रख दिया था। हालत यह हो गई थी कि अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन बीच में कूदे और उन्होंने मिस्र पर दबाव डालकर संघर्ष विराम करवाया।

बेशक सीरिया के भीतर होने वाले इस्राईली हवाई हमलों पर भी हमारी नज़र है लेकिन हमें यक़ीन है कि गोलान हाइट्स से इस्राईल को शिकस्त खाकर निकलना पड़ेगा बल्कि सारे अरबी इलाक़े उसे ख़ाली करने पड़ेंगे।

जब अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका को शिकस्त हो गई और इराक़ से भी कुछ ही दिनों के भीतर उसे अपनी सेना बाहर निकालनी है तो फिर इस्राईली सेना की क्या औक़ात है कि वह सीरियाई इलाक़ों में क़ब्ज़ा करके वहीं जमी रहेगी।

लेबनान में हिज़्बुल्लाह, गज़्ज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनी संगठनों, इराक़ में हश्दुश्शाबी और यमन में अंसारुल्लाह के पास जो मिसाइल हैं उनकी ताक़त और सटीक निशाने का लोहा अब सारी दुनिया मान चुकी है। इन मिसाइलों ने सऊदी अरब के भीतर अमरीकी पैट्रियट और थाड सिस्टम को नाकाम बना दिया। इस्राईल का आयरन डोम फ़िलिस्तीनी मिसाइलों के सामने फ़ेल हो चुका है।

सीरिया के पास इन सारे हथियारों से अधिक ताक़तवर हथियार उसका स्ट्रैटेजिक संयम है। आज सीरिया बहुत बड़े संकट से उबर चुका है और बहुत ताक़तवर बनकर उभरा है। आज सीरिया उस प्रतिरोधक मोर्चे का हिस्सा है जो आज तक अपना कोई भी युद्ध हारा नहीं है। जब इस्राईल ने गोलाइन हाइट्स पर क़ब्ज़ा किया था उस समय सीरिया इस मोर्चे का हिस्सा नहीं था क्योंकि यह मोर्चा तब बना नहीं था।

बेनेत से हमें बस यह कहना है कि इस्राईल 1967 के बाद से आज तक एक भी युद्ध जीत नहीं सका है। गोलान हाइट्स सीरिया का इलाक़ा है और उसके पास वापस जाएगा जिस तरह सीरिया के दूसरे इलाक़े आतंकियों के क़ब्ज़े से आज़ाद होकर उसके पास लौटे हैं। इसी के साथ पूरा फ़िलिस्तीन फ़िलिस्तीनियों को वापस मिलेगा। बस इंतेज़ार कीजिए।

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