Oct १५, २०२१ ११:२४ Asia/Kolkata

अतिग्रहणकारी ज़ायोनी सैनिकों ने वेस्ट बैंक के उत्तरी क्षेत्र में स्थित सेल्फ़ीत शहर में फ़िलिस्तीनियों को उनके खेतों में जाने नहीं दिया और फ़िलिस्तीनी अपने ज़ैतून के फल नहीं तोड़ सके।

.यह फ़िलिस्तीनियों की आजीविका चलाने का एक मात्र साधन है, इस्राईल चाहता है कि इस तरह से फ़िलिस्तीनी अपनी ज़मीनों को छोड़ दें ताकि यह ज़मीनें बस्तियों के निर्माण के लिए तैयार की जाएं। फ़िलिस्तीन के एक सक्रिय कार्यकर्ता सलाहुल ख़ाजा का कहना है कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन फ़िलिस्तीनियों को परेशान करके और अनेक तरह की यातनाएं देकर फ़िलिस्तीनी किसानों को उनके खेतों और ज़मीनों पर जाने नहीं देता, यहां तक कि कुछ पेड़ों पर ज़हर भी फेंक देता है लेकिन हमको उनको उनके लक्ष्य तक नहीं पहुंचने देना है, हमें अपने खेतों और ज़मीनों पर जाना होगा ताकि अपनी आजीविका खेतों और अपनी फ़स्लों से चला सकें।

फ़िलिस्तीनियों को उनकी ज़ैतून की फस्ल से लाभ उठाने से वंचित करने की इस्राईल की नीतियों के बाद बहुत से फ़िलिस्तीनी जवानों ने फ़िलिस्तीनियों को उनके खेतों और ज़मीनों की देखभाल करने में मदद करने का कार्यक्रम बनाया है।

यह एसी हालत में है कि ज़ैतून के बहुत से पेड़ ख़याल न रखे जाने की वजह से सूख गये हैं। फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध परिषद के सदस्य वलीद अस्साफ़ का कहना है कि यह हमारी ज़मीन है, हम जब चाहें अपनी ज़मीनों और खेतों पर आ सकते हैं, यह हमारा मौलिक अधिकार है, अपने खेतों में काम करें और अपने खेतों और पेड़ों का ख़याल रखें, हमारा खेत ख़राब हो गया है, इस्राईली सैनिक हमें आने नहीं देते, वह ज़मीन को ख़राब करना चाहते हैं ताकि कोई पैदावार न हो सके।

 हम मानवता और खेतों और यहां तक कि ज़ैतून के पेड़ों के ख़िलाफ़ जंग देख रहे हैं जो फ़िलिस्तीनियों की आजीविका के साधन हैं।

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