Oct २५, २०२१ ११:०९ Asia/Kolkata
  • कवाला, वह नेता जिसके मामले में तुर्क राष्ट्रपति ने दस देशों के राजदूतों की भेंट चढ़ा दी,

दस पश्चिमी देशों के साथ तुर्की के कूटनयिक संबंधों में नया संकट पैदा हो जाने के लक्षण साफ़ नज़र आने लगे हैं और यह उसमान कवाला के मुद्दे को लेकर हुआ है जो इस्तांबूल में जेल में बंद हैं।

तुर्की ने इस मामले में अमरीका और जर्मनी सहित दस पश्चिमी देशों के राजदूतों को अप्रित्य तत्व क़रार देने का फ़ैसला किया है।

दस देशों के दूतावासों ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि राजनैतिक कार्यकर्ता उसमान कवाला का मुद्दा तुर्की के लोकतंत्र और क़ानून की संप्रभुता पर सीधे रूप से असर डाल रहा है। बयान में मांग की गई कि कवाला को तत्काल रिहा किया जाए। इन दस देशों में अमरीका, जर्मनी, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, हालैंड, स्वीडन, कैनेडा, नार्वे और न्यूज़ीलैंड हैं।

इन देशों के दूतावासों ने बयान में मांग की थी कि कवाला को अदालत में पेश किया जाए और अदालती नियमों के आधार पर उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही की जाए।

यूरोपीय परिषद ने भी तुर्की को चेतावनी दी है कि अगर उसने कवाला को रिहा न किया तो वह तुर्की के ख़िलाफ़ कार्यावही करेगी।

कवाला पिछले चार साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं, उन पर विरोध-प्रदर्शन के समर्थन और तख़्तापलट की कोशिश के आरोप हैं, हालाँकि उन्हें दोषी साबित नहीं किया जा सका है।

मानवाधिकारों के लिए यूरोप की प्रमुख संस्था काउंसिल ऑफ़ यूरोप ने भी तुर्की को यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय के उस आदेश का पालन करने की आख़िरी चेतावनी दी है, जिसमें कवाला को लंबित मुक़दमे से मुक्त करने का आदेश दिया था।

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