Nov २४, २०२१ १५:५५ Asia/Kolkata

शरणार्थियों को बसाने, भूमध्य सागर में ऊर्जा के स्रोतों और साइप्रस के कुछ हिस्सों पर क़ब्ज़े को लेकर तुर्की और यूनान के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो गया है और वर्ष 2020 के बाद अब यह विवाद नये चरण में दाख़िल हो गया है।

एथन्स और अंकारा के अधिकारी एक दूसरे को सैन्य कार्यवाही की धमकी भी दे चुके हैं, वर्ष 2020 में पैदा होने वाले तनाव के बाद यूनान की तरफ़ से मीज़ाइल हमले की धमकी के बाद इस बार तुर्की की सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता मतीन कोनोक ने यूनान पर क़ब्ज़े की धमकी दे दी।

उनका कहना था कि मैंने सुना है कि यूनान, तुर्की पर मीज़ाइल हमला करना चाहता है, उनको यह करने दें और हम पांच घंटे बाद एथेन्स में होंगे। इस बयान पर यूनाना की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई लेकिन इससे पहले यूनान के विदेशमंत्री ने तुर्की को क्षेत्र की सारी मुसीबतों की जड़ क़रार दिया।

 खेद की बात यह है कि क्षेत्र में ज़्यादातर समस्याओं की जड़ हमारा पड़ोसी तुर्की है, इसी के साथ फ़्रांस ने यूनान और साइप्रस का समर्थन करते हुए अपना ओवरगन नामक युद्धपोत भूमध्य सागर की ओर रवाना कर दिया और अमरीका ने भी एथेन्स के साथ अपने सैन्य समझौते की समयावधि बढ़ा दिया और वह यूनान में अपनी सैन्य छावनी बढ़ाने और इस देश में और अधिक सैनिक और सैन्य उपकरणों को भेजने का इराद रखता है।

तुर्की वतन पार्टी के महासचिव ओज़ोगोर बोरसाली का कहना है कि अमरीका ने यूनान को सैन्य छावनी बना दिया है और यह तुर्की के लिए बहुत बड़ा ख़तरा समझा जाता है कि वह हर तरफ़ से हमें घेरना चाहते हैं।

 नैटो के दो घटक के रूप में अंकारा और एथेन्स के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है और नौबत झड़पों तक पहुंच गयी है, दोनों ओर से शांतिपूर्ण तरीक़े से समस्या के समाधान के बारे में आने वाले बयानों के बावजूद दोनों देशों के संबंध अभी भी तनावग्रस्त हैं और सैन्य टकराव की गंध आ रही है। (AK)

 

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