Nov २५, २०२१ २३:४४ Asia/Kolkata
  • एक के बाद दूसरे प्रतिरोधक गुट को आंतकी सूचि में डालने का कारण क्या है?

पश्चिम ने मध्यपूर्व के प्रतिरोध आन्दोलनों को फिर से निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। यह वे संगठन हैं जो अपनी मातृभूमि के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं।

ब्रिटेन की ओर से हमास को आतंकवादी गुट घोषित करने के बाद उसी के पद चिन्हों पर चलते हुए आस्ट्रेलिया ने भी लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आन्दोलन हिज़बुल्लाह को ब्लैक लिस्टेट कर दिया है।  आस्ट्रेलिया की सरकार ने 24 नवंबर को यह काम किया।

आस्ट्रेलिया के गृहमंत्री कैरेन एड्रोज़ ने बताया कि फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी और इज़्ज़ुद्दीन क़स्साम संगठनों का समर्थन करने के कारण हिज़बुल्लाह को आतंकवादी गुटों की सूचि मे रखा गया है।  उन्होंने हिज़बुल्लाह को ख़तरा भी बताया।

आस्ट्रेलिया ने यह काम ब्रिटेन की ओर से हमास को ब्लैक लिस्टेड करने के एक सप्ताह के भीतर किया है।  आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन की ओर से की जाने वाली यह कार्यवाहियां, पश्चिमी एशिया के प्रतिरोधी गुटों पर सुनियोजित ढंग से दबाव बनाने के अर्थ में हैं।

इस बारे में यमन की सरकार ने कहा है कि यह काम अमरीकी आदेशों को पूरा करने के लिए किया गया है जो पूरी तरह से अवैध ज़ायोनी शासन के हित में है।  हिज़बुल्लाह और हमास के विरुद्ध ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया की यह हरकत खुले तौर पर फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध है।

फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी ने कहा है कि आस्ट्रेलिया ने यह काम ज़ायोनियों के दबाव में किया है जो अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के उल्लंघनकर्ता हैं।

यहां पर एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि पश्चिम द्वारा प्रतिरोधक गुटों के विरुद्ध इस प्रकार के क़दम एसी स्थिति में उठाए गए हैं कि जब इस समय ज़ायोनी शासन काफी दबाव में है।  उसे प्रतिरोधक गुटों के संभावित हमले का डर सता रहा है।  ज़ायोनियों के बढ़ते अत्याचारों के जवाब में फ़िलिस्तीनियों ने हाल ही में दो शहादत प्रेमी कार्यवाहियां अंजाम दीं।  ज़ायोनियों को अब यह डर है कि कहीं फ़िलिस्तीनियों का नया इन्तेफ़ाज़ा आरंभ न हो जाए जो उनके लिए मुसीबत बन जाए।

एक अन्य बात यह है कि आस्ट्रेलिया ने हिज़बुल्लाह को उस समय आतंकवादी गुटों की सूचि में डाला है कि जब लेबनान गंभीरत राजनीतिक संकट से गुज़र रहा है।

पश्चिम विशेषकर अमरीका के समर्थन से होने वाला यह काम, किसी भी स्थिति में लेबनान में शांति एवं स्थिरता में सहायक नहीं हो सकेगा। विगत के अनुभवों ने यह सिद्ध कर दिया है कि इस प्रकार की कार्यवाहियों से प्रतिरोध आन्दोलन कमज़ोर नहीं हुए हैं।

टीकाकारों का कहना है कि लेबनान संकट को अधिक जटिल बनाने के लिए यह क़दम उठाया गया है।  विशेष बात यह है कि ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया ने हमास और हिज़बुल्लाह संगठनों को एसी स्थिति में ब्लैक लिस्टेड किया है कि यह दोनो ही अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह संगठन उन राष्ट्रों का हिस्सा हैं जो सरकारी आतंकवाद की भेंट चढ़े हैं।

इन बातों से यह नतीजा निकाला जा सकता है कि पश्चिम, आतंकवाद को पश्चिमी एशिया के प्रतिरोधी गुटों के विरुद्ध एक हथकण्डे के रूप में प्रयोग कर रहा है।

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