Nov २६, २०२१ ०९:०४ Asia/Kolkata
  • अमरीका और सऊदी अरब के बीच तनाव फिर बढ़ा, बिन सलमान अपनी बात पर अड़े....

अमरीका और सऊदी अरब के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अमरीका और सऊदी अरब के बीच यह हालात तेल की पैदावार को लेकर बने हैं। कोरोना महामारी की वजह से कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने जो रणनीति अपनाई है उससे अमरीका के हालात बिगड़ गये हैं और अमरीकी प्रशासन की लाख अपील के बावजूद सऊदी क्राउन प्रिंस तेल की आपूर्ति न बढ़ाने के फ़ैसले पर अडिग हैं।

आख़िरकार अमरीका ने पिछले मंगलवार घोषणा की कि पेट्रोल के दाम कम करने के लिए वो अपने 'रणनीतिक भंडार' से 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल जारी करेगा ताकि इससे अमरीकी जनता को राहत मिले।

अमरीका के इस बड़े कदम से बाज़ार में तेल की आपूर्ति में काफ़ी मदद होगी। ज्ञात रहे कि पिछले डेढ़ साल से तेल उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) के बीच सहमति हुई थी कि कोरोना महामारी की वजह से तेल की मांग कम हुई और तेल के दाम भी काफ़ी कम हुए थे जिसके बाद इन देशों ने तेल का उत्पादन घटाने का फ़ैसला किया था।

कच्चे तेल के इन प्रमुख उत्पादक देशों की कोशिश है कि तेल के दाम बढ़ाने के लिए बाज़ार को नियंत्रण में रखा जाए हालांकि, अमरीका ने कोरोना महामारी का असर कम होने के बाद इन देशों से लगातार तेल का उत्पादन तेजी से बढ़ाने की अपील की लेकिन इन देशों ने साफ़ तौर पर ऐसा करने से मना किया है और कहा है कि वे अपने उत्पादन को धीरे-धीरे और सीमित मात्रा में ही बढ़ाएंगे। 

अमरीका में मुद्रास्फीति 30 सालों के उच्च स्तर की ओर बढ़ रही है और गैसोलीन की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। अक्तूबर के महीने में बाइडेन ने कहा था कि कि रूस और सऊदी अरब जैसे तेल उत्पादक देशों ने ज़्यादा से ज़्यादा तेल न निकालने का फ़ैसला किया है जिसकी वजह से हमें गैसोलीन की कमी महसूस हो रही है और यह तरीक़ा सही नहीं है। (AK)

 

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