Nov २७, २०२१ १३:४१ Asia/Kolkata

...मिस्र की राजधानी क़ाहेरा से जब हम निकलते हैं और इसके पूर्वोत्तर में जाते हैं तो क़ाहेरा प्रांत और अलग़लयूबिया प्रांतों के बीच एक भीड़भाड़ वाले गांव में पहुंचते हैं जहां नामवर गवर्नर का मज़ार है जिसने अपने मौला हज़रत अली के लिए अपनी वफ़ादारी की मिसाल क़ायम की।

मालेके अश्तर नख़ई। मज़ार के प्रवेश द्वार से एक लंबी रास्ता गया है जिसके चारों और बाग़ हैं और वह जाकर एक चौकौर कमरे पर ख़त्म होता है जहां मज़ार है।....स्थानीय युवा अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहता है कि हज़रत अली को मालिक अश्तर पर बहुत विश्वास था। इसीलिए उन्हें मिस्र का गवर्नर बनाया था।

मज़ार के ख़ादिम ने हमारे लिए दरवाज़ा खोला। क़ब्र इसके बीच में स्थित है जो सब्ज़ मख़मली चादर से ढंका है। वह महान कमांडर जो हज़रत अली के बहुत क़रीब थे और उन्हें हज़रत अली ने मिस्र का गवर्नर बनाकर भेजा था। लेकिन मिस्र पहुंचने से पहले ही उन्हें ज़हर दे दिया गया।....स्थानीय युवा ने बताया कि कोरोना महामारी से पहले तक मिस्र और दूसरे देशों से बहुत से लोग यहां ज़ियारत के लिए आते थे। मगर इन दिनों ज़ायर नहीं आ रहे हैं।

मक़बरे के भीतर ऊद और अंबर की दिलनशीं ख़ुशबू फैली रहती है। दीवारों को भीतर की तरफ़ से बड़ी सुंदर लिखावट और सोने के काम से सजाया गया है। इस कमरे के बाहर एक क़ब्र है हो मालिक अश्तर के हिंदुस्तानी सेवक की है जिसने पहली बार इस जगह का निर्माण किया था। कोरोना वायरस की महामारी की वजह से इस धार्मिक स्थल पर ज़ायरीन का आगमन बहुत कम हो गया है। क़ाहेरा से आईआरआईबी के ला समीरा मुंतज़ेरी की रिपोर्ट  

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