Dec ०३, २०२१ १७:३३ Asia/Kolkata

इराक़ का एतिहासिक शहर बग़दाद काज़मैन के धार्मिक स्थलों के अलावा भी अनेक धार्मिक और पर्यटक स्थलों से मालामाल है। बग़दाद के केन्द्र में दजला नदी बेहद सुंदर दृष्य पेश करती है।

यह जगह परिवारों की सैर और तफ़रीह का केन्द्र बन गयी है।  इसी नदी के तट पर मुसतंसेरिया मदरसा है जो 1000 साल से ज़्यादा पुराना है। मुसतंसेरिया प्राचीन इस्लामी इमारत है जिसका संबंध अब्बासी शासनकाल से है।....स्थानीय बुज़ुर्ग कहते हैं कि मुसतंसेरिया मदरसा बग़दाद के दर्शनीय स्थलों में से एक है। मंगोलों ने जब बग़दाद पर हमला किया था तो इस मदरसे के भीतर मौजूद सारी किताबों को दजला नदी में फेंक दिया गया। कहते हैं कि दुनिया की सबसे क़ीमती किताबों की सियाही से दजला नदी के पानी का रंग बदल गया था। मुसतंसेरिया मदरसे के क़रीब शैख़ कुलैमानी का मज़ार है जो इस्लामी इतिहास की महान हस्ती हैं। शैख़ कुलैनी का लक़ब सेक़तुल इस्लाम है और उनका संबंध था ईरान से था। शैख़ कुलैनी की क़ब्र के पास कई एतिहासिक बाज़ार हैं। एक बाज़ार का नाम किताबे अलमुतनब्बी है। इसके पास ही दूसरा बाज़ार है जहां इराक़ के हस्तकला उद्योग के नामूनों को रखा गया है और यह इन्हं उत्पादों के लिए विशेष है।.....एक युवा का कहना है कि यह बग़दाद का एक मात्र हस्तकला उद्योग बाज़ार है। बहुत सारे लोग जब बग़दाद घूमने आते हैं तो धार्मिक स्थलो की ज़ियारत के बाद सफ़ाफ़ीर बाज़ार में आते है जो तांबे का बाज़ार है। अलसफ़ाफ़ीर बाज़ार के पीछे भी इस्लामी जगत की बड़ी महान हस्ती की क़ब्र है। यह इमाम ज़माना के चौथे और आखिरी प्रतिनिधि का मज़ार है जिनका नाम शैख़ अबुल हसन अली इब्ने मुहम्मद अलसिम्मेरी था। वह इमामे ज़माना के आख़िरी प्रतिनिधि थे। बग़दाद से आईआरआईबी के लिए जलाल ख़ालेदी की रिपोर्ट   

 

 

 

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